नई दिल्ली, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल ही में भारत दौरे के बाद अब कूटनीति की बारीकियों में भारत ने संतुलित चाल चलना शुरू कर दिया है इसके तहत यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के भारत दौरे की तैयारियाँ जोरों पर हैं यह कदम भारत की विदेश नीति में सधी और संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य दोनों बड़े देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना हैइस पूरी कूटनीतिक तैयारी में मुख्य भूमिका भारत सरकार की है विदेश मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियाँ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PMO) जेलेंस्की के दौरे की रूपरेखा तय कर रहे हैं

साथ ही, रूस और यूक्रेन दोनों देशों के नेताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखा जा रहा है पुतिन के दिल्ली दौरे के बाद अब जेलेंस्की के भारत आगमन की योजना बनाई जा रही है इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका संतुलित दृष्टिकोण दोनों पक्षों को भरोसा दे और किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय जटिलता से बचा जा सकेपुतिन के दौरे के तुरंत बाद ही जेलेंस्की के दौरे की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं इस दौरे की सटीक तिथि अभी अंतिम चरण में है, लेकिन यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इसे आने वाले महीनों में आयोजित किया जाएगा जेलेंस्की का यह दौरा मुख्य रूप से दिल्ली में होगा, जहाँ भारत सरकार के शीर्ष नेतृत्व और विभिन्न मंत्रालयों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता होगी इसके अलावा, दौरे के दौरान अन्य संभावित स्थलों का दौरा भी हो सकता है

भारत का उद्देश्य स्पष्ट है कि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संतुलित और भरोसेमंद संबंध बनाए रखना, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक समझौते, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा करना भारत की प्राथमिकता है यह कदम भारत की विदेश नीति की परिपक्वता और रणनीतिक सोच का परिचायक है भारत ने दोनों देशों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा है इस दौरे की तैयारियाँ सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, और राजनीतिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं इसके अलावा, कूटनीतिक टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी पहलुओं पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए और भारत की रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक रूप में देखी जाए यह कदम भारत की संतुलित विदेश नीति की झलक है,

जिसमें दोनों देशों के साथ संबंधों को बनाए रखना और वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत करना इसमें शामिल है पुतिन और जेलेंस्की के दौरे के बीच भारत ने अपनी कूटनीति को इस तरह से तैयार किया है कि वह किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय दबाव या टकराव से बच सके और साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा भी कर सके
