देशभर में आज फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी सेवाएं ठप हो सकती हैं Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto और Instamart जैसे बड़े ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स से जुड़े करीब 1 लाख डिलीवरी वर्कर्स एकदिवसीय हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं वर्कर्स का आरोप है कि बढ़ते ऑर्डर के बावजूद उनकी कमाई लगातार घट रही है, जबकि बिना स्पष्ट कारण के आईडी ब्लॉक किए जाने से उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है डिलीवरी वर्कर्स संगठनों पिछले कुछ महीनों में कंपनियों ने इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बदलाव किया है, जिससे प्रति ऑर्डर मिलने वाली राशि कम हो गई है पहले जहां एक डिलीवरी पर 35 से 50 रुपये तक मिलते थे, अब कई शहरों में यह घटकर 20–25 रुपये रह गई है इसके साथ ही लंबी दूरी, ट्रैफिक और ईंधन की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ वर्कर्स पर डाला जा रहा हैवर्कर्स का कहना है कि प्लेटफॉर्म्स लगातार ऑर्डर तो बढ़ा रहे हैं,

लेकिन न्यूनतम कमाई की कोई गारंटी नहीं दी जा रही है कई डिलीवरी पार्टनर्स को दिनभर काम करने के बाद भी तय न्यूनतम आय नहीं मिल पा रही है वहीं शिकायत करने या ऐप पर रेटिंग गिरने की स्थिति में आईडी सस्पेंड या ब्लॉक कर दी जाती है जिससे वे अचानक बेरोजगार हो जाते हैं यह हड़ताल दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और जयपुर जैसे बड़े शहरों में ज्यादा देखने को मिल सकता है डिलीवरी वर्कर्स ने इन शहरों में प्रदर्शन और रैलियों की भी घोषणा की है संगठनों का दावा है कि यदि सरकार और कंपनियों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है वर्कर्स की प्रमुख मांगों में प्रति ऑर्डर न्यूनतम भुगतान तय करना, आईडी ब्लॉक करने से पहले नोटिस देना, इंश्योरेंस कवर, एक्सीडेंटल सुरक्षा और पारदर्शी पेमेंट सिस्टम शामिल हैं उनका कहना है कि वे फ्रीलांसर या गिग वर्कर जरूर हैं,

लेकिन लगातार बढ़ते काम के दबाव के बीच बुनियादी सुरक्षा और सम्मान की मांग करना उनका अधिकार है इस हड़ताल की वजह से आज ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है कई इलाकों में ऑर्डर लेट होने, ऐप पर डिलीवरी स्लॉट न मिलने या सर्विस पूरी तरह बंद रहने की संभावना जताई जा रही है कुछ प्लेटफॉर्म्स ने सीमित स्टाफ के साथ सेवाएं जारी रखने की कोशिश की बात कही है लेकिन असर पूरी तरह टाल पाना मुश्किल माना जा रहा है गिग इकॉनमी में काम करने वाले वर्कर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है,

लेकिन उनके अधिकारों और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति अब भी नहीं बनी है अगर इस तरह के विरोध लगातार बढ़ते रहे, तो इसका सीधा असर डिजिटल डिलीवरी सेक्टर और ग्राहकों दोनों पर पड़ेगाफिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनियां वर्कर्स की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं और सरकार इस मुद्दे में कोई हस्तक्षेप करती है या नहीं
