बिहार की सियासत में एक और बड़ा बदलाव। कभी हसनपुर से विधायक रहे लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव अब न विधायक हैं, न मंत्री और न ही उनके पास अब वह आलीशान सरकारी बंगला रहेगा जो कभी उनकी शान हुआ करता था। पटना के पॉश इलाके स्ट्रैंड रोड स्थित 26एम नंबर बंगला अब जल्द ही उनका पुराना पता बनने वाला है।

भवन निर्माण विभाग ने साफ कर दिया है कि पूर्व विधायक का पद चले जाने के बाद सरकारी आवास पर उनका कोई हक नहीं रह जाता। नियम के मुताबिक नोटिस जारी होने के एक महीने के अंदर बंगला खाली करना अनिवार्य है। सूत्र बता रहे हैं कि यह नोटिस तेजप्रताप को जल्द ही थमा दिया जाएगा, अगर अभी तक नहीं थमाया गया है। इसके बाद उनके पास अधिकतम 30 दिन का समय होगा। अगर वे अतिरिक्त मोहलत मांगते हैं तो विभाग हालात देखकर कुछ दिन की छूट दे सकता है, लेकिन अनिश्चित काल तक सरकारी बंगले पर कब्जा बरकरार रखना मुमकिन नहीं।यह वही बंगला है जो कभी तेजप्रताप को विधायक कोटे में मिला था। नीतीश कुमार सरकार ने इसे अब नए मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन को आवंटित कर दिया है। यानी जिस दिन तेजप्रताप बाहर निकलेंगे, उसी दिन नया मंत्री अंदर आएगा।
अब कहाँ जाएंगे तेजप्रताप?

चुनाव हारने के बाद से ही तेजप्रताप नया ठिकाना तलाश रहे हैं। उनकी Y कैटेगरी की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। सामान्य फ्लैट या मकान में Y कैटेगरी सिक्योरिटी देना आसान नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियाँ चाहती हैं कि नया घर या तो ग्राउंड फ्लोर पर हो या फिर किसी हाई-राइज बिल्डिंग के खास सेक्शन में, जहाँ जवानों की मूवमेंट, एंट्री-एग्जिट पॉइंट और मॉनिटरिंग आसानी से हो सके।फिलहाल वे अभी भी 26एम स्ट्रैंड रोड वाले बंगले में हैं, लेकिन ब्रोकरों और रियल एस्टेट एजेंट्स के साथ लगातार मीटिंग चल रही है। पटना के दीघा, कंकड़बाग, बोरिंग रोड और राजीव नगर जैसे इलाकों में कुछ लग्जरी फ्लैट्स और इंडिपेंडेंट घर शॉर्टलिस्ट किए गए हैं, लेकिन सिक्योरिटी क्लीयरेंस मिलना बाकी है।
क्या माता-पिता के घर लौट सकते हैं?

यह सवाल हर किसी की जुबान पर है, लेकिन जवाब साफ है – नहीं। लालू प्रसाद यादव ने छह साल पहले ही तेजप्रताप को परिवार और पार्टी दोनों से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कारण थे – लगातार विवाद, अनुशासनहीनता और पारिवारिक मूल्यों का कथित उल्लंघन। लालू ने साफ कहा था कि तेजप्रताप अब न परिवार का हिस्सा हैं, न RJD का। दूसरी तरफ खुद तेजप्रताप भी बार-बार कह चुके हैं कि वे न पार्टी में लौटेंगे, न परिवार के पास। वे अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने और नई राह पर चलने की बात करते रहे हैं। ऐसे में 10 सर्कुलर रोड (लालू-राबड़ी का घर) या मां राबड़ी देवी का 4 देशरत्न मार्ग वाला बंगला, दोनों ही उनके लिए बंद दरवाजे हैं।
अगर विभाग ने सख्ती की तो?

सूत्रों का कहना है कि अगर भवन निर्माण विभाग ने एकदम सख्ती दिखाई और मोहलत नहीं दी, तो सुरक्षा एजेंसियाँ बीच का रास्ता निकाल सकती हैं। अस्थायी तौर पर किसी सरकारी गेस्ट हाउस, सर्किट हाउस या किसी सुरक्षित कैंपस में उन्हें जगह दी जा सकती है, जब तक उनका नया निजी घर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता। एक दौर था जब तेजप्रताप यादव बिहार के सबसे चर्चित और विवादित मंत्री थे। पर्यावरण मंत्री रहते हुए उन्होंने विभाग के सचिव को भगाया था, ताला तोड़वाया था और नौकरशाही को खुली चुनौती दी थी। लेकिन 2025 का चुनाव उनके लिए करियर का सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। हसनपुर सीट गंवाने के बाद न विधायकी बची, न मंत्रित्व और अब सरकारी बंगला भी जा रहा है। अब देखना यह है कि पटना में वे अपना नया आशियाना कहाँ बनाते हैं और Y कैटेगरी सुरक्षा के साथ कितने दिन तक अलग राजनीतिक सफर जारी रख पाते हैं।फिलहाल एक बात पक्की है – 26एम स्ट्रैंड रोड का पता जल्द ही तेजप्रताप यादव की जिंदगी से डिलीट होने वाला है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
