लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष बहस आयोजित की गई यह बहस भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को उजागर करने के लिए आयोजित की गई थी सांसदों ने गीत के रचनाकाल, स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका, आधुनिक प्रासंगिकता और समाज में योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई इस बहस में वंदे मातरम् को केवल राष्ट्रगीत नहीं बल्कि भारतीय गौरव, एकता और संस्कृति का प्रतीक बताया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहस की शुरुआत की और कहा कि वंदे मातरम् भारत की आत्मा, ऊर्जा, संकल्प और गौरव का प्रतीक है उन्होंने इसे सुनकर गर्व महसूस करने की बात कही इसके अलावा, विपक्षी दलों के नेता जैसे कांग्रेस के प्रतिनिधि, राज्यसभा और लोकसभा के अन्य सांसदों ने भी इस बहस में भाग लिया सभी सांसदों ने गीत के महत्व, इतिहास, आधुनिक प्रासंगिकता और समाज में योगदान पर अपने विचार साझा किए यह बहस सोमवार 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा सांसद के मुख्य हॉल में इसकी चर्चा हुई,

जिसमें सांसदों ने अपने विचार रखे और प्रधानमंत्री ने बहस का नेतृत्व कियाइस बहस का उद्देश्य वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने लाना था यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है और भारतीय राष्ट्रवाद, गौरव और एकता का संदेश देता है प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बहस के माध्यम से देशवासियों में राष्ट्रीय गौरव और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है यह बहस केवल इतिहास पर नहीं, बल्कि आज के सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में गीत की प्रासंगिकता पर भी केंद्रित थी

संसद में बहस में गीत के निर्माण की प्रक्रिया, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचना, आनंदमठ में इसका स्थान और स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई सांसदों ने वंदे मातरम् के विवादित पहलुओं और समाज में इसके योगदान पर भी अपने विचार रखे यह गीत आज भी उतना ही प्रेरक है जितना 150 साल पहले था और यह देशवासियों में राष्ट्रीय गौरव और एकता का संदेश देता है इस बहस के दौरान सांसदों ने गीत के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को भी रेखांकित किया
