राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को लेकर महीनों से simmer हो रहा किसानों का असंतोष बुधवार शाम को अचानक उग्र विस्फोट में बदल गया जो विरोध लंबे समय से शांतिपूर्ण धरनों, जनसुनवाई की मांग और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर सवालों तक सीमित था, वह अचानक ऐसी हिंसा में तब्दील हो गया कि पूरा इलाका धुएं, अफरा-तफरी और पुलिस-भीड़ की भिड़ंत से भर गया , प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना फैक्ट्री निर्माण चालू करवा दिया और ट्रकों में भरकर मशीनरी तथा निर्माण सामग्री परिसर में भेजी जा रही थी

उनका दावा था कि इस फैक्ट्री से इलाके का भूजल तेजी से दूषित होगा, खेतों में खड़े फसलों पर असर पड़ेगा और पूरी कृषि व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी इसी वजह से महीनों से चल रहा विरोध अचानक गुस्से के उफान में बदल गया किसानों ने पहले फैक्ट्री की बाहरी चारदीवारी के पास इकट्ठा होकर नारेबाजी की, फिर उग्र भीड़ ट्रैक्टर लेकर दीवार की तरफ बढ़ी और देखते-देखते परिसर की दीवार को धक्का मारकर गिरा दिया भीड़ अंदर घुसी और वहां खड़ी कई गाड़ियों, JCB मशीन, केबिन और ऑफिस को आग में जला दिया पुरानी और नई गाड़ियों को मिलाकर लगभग 14 से ज्यादा वाहन जलकर खाक हो गए कई घंटे तक परिसर से धुआं उठता रहा और फायर ब्रिगेड की टीम को अंदर घुसने तक का मौका नहीं मिला इस बीच पथराव होने शुरू हो गया देखते ही देखते ,भगदड़ मची और पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा सुबह से ही तनाव की खबरें आती रही

लेकिन दोपहर तक आंदोलन शांत हुआ लगभग चार बजे ट्रकों के पहुंचने और मशीनरी उतारे जाने की सूचना फैली, जिसके बाद भीड़ तेजी से फैक्ट्री के गेट पर जमा होने लगी करीब पांच बजे दीवार तोड़ी गई और छह बजे के आसपास पहली आगजनी हुई, जिसके बाद पूरा इलाका धुएँ से भर गया यह घटनाक्रम हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में फैला, जहाँ एथेनॉल फैक्ट्री का निर्माण कार्य चल रहा था यह वह इलाका है जहाँ के ग्रामीण पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं और अपनी जमीन तथा पानी को सबसे बड़ी संपत्ति मानते हैं फैक्ट्री स्थल के आसपास के कई गांव तेजपुर, मीठाखेड़ा, कड़ेल, जंडवाला सहित दर्जनों छोटे ढाणों के लोग विरोध में उतर आए भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई बार पुलिस को पीछे हटना पड़ा हिंसा बढ़ने पर इन गांवों के कई परिवारों ने रात को अपने घर छोड़ दिए इसका कारण था लगातार उठ रहे धुएं, पुलिस कार्रवाई और भीड़ के अनियंत्रित व्यवहार से पैदा हुआ डर इस पूरी घटना का केंद्र स्थानीय किसान और ग्रामीण समुदाय थे

जिनमें महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल थे किसान संगठनों के अलावा कई सामाजिक समूह भी फैक्ट्री के विरोध में एकजुट थे दूसरी तरफ जिला प्रशासन, पुलिस बल, आरएसी और होमगार्ड की टीमें मौके पर तैनात थीं राजनीतिक रूप से यह मामला तब और गंभीर हो गया जब कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया भीड़ में पहुंचे और एक पथराव के दौरान घायल हो गए जिससे उनका सिर फट गया और उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है इस विवाद की जड़ में किसानों की वह गहरी चिंता है जिसमें वे कहते हैं कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके जलस्रोतों को प्रभावित करेगी टिब्बी और आस-पास के इलाके पहले ही पानी की कमी और गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे हैं ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट, रसायन और गंध पूरे क्षेत्र के भूजल को जहरीला कर देगा, जिससे उनकी फसलें, पशुधन और पीने का पानी सब प्रभावित होंगे किसानों ने महीनों तक धरना देकर अपने विरोध को दर्ज कराया, लेकिन जब उन्हें लगा कि बिना सहमति निर्माण फिर से शुरू करवा दिया गया है,

तो उनमें अविश्वास और गुस्सा और बढ़ गया , किसानों का एक छोटा समूह पहले फैक्ट्री के गेट पर इकट्ठा हुआ, फिर जैसे-जैसे खबर फैली कि फैक्ट्री में मशीनरी उतारी जा रही है, स्थिति अचानक बदलती गई विरोध कर रही भीड़ का आकार बहुत बड़ा हो गया पुलिस ने बैरिकेड लगाकर भीड़ को रोकने की कोशिश की लेकिन भीड़ ने बैरिकेड तक तोड़ दिए कुछ ही मिनटों में लोग ट्रैक्टर और औजार लेकर दीवार की ओर बढ़े और उसे गिरा दिया दीवार गिरते ही भीड़ अंदर घुसी और आगजनी शुरू हो गई पुलिस ने शुरुआत में मना किया, फिर भीड़ के बढ़ते हमले को देखते हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा लेकिन यह भीड़ को रोकने में आसान नहीं था रात में जब हालात कुछ शांत हुए तो प्रशासन ने पूरे इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया और आसपास के गांवों में पुलिस गश्त बढ़ा दी
