प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कर्नाटक और गोवा के धार्मिक दौरे में आस्था और राष्ट्रनीति को एक सूत्र में पिरोया। दिन की शुरुआत उडुपी के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मठ से हुई, जहां पीएम ने पूजा-अर्चना की, सुवर्ण तीर्थ मंडप का लोकार्पण किया और स्वर्ण कलश चढ़ाया।

इसके बाद करीब एक लाख श्रद्धालुओं के साथ उन्होंने सामूहिक श्रीमद्भगवद्गीता पाठ किया।उडुपी में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भगवत गीता के संदेश को आज के भारत से जोड़ा। उन्होंने कहा, “गीता हमें सिखाती है कि शांति और सत्य की पुनर्स्थापना के लिए अत्याचार का अंत करना आवश्यक है। यही आज के नए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का मूल मंत्र है। पहले की सरकारें आतंकी हमलों के बाद भी चुप रहती थीं, लेकिन आज का भारत घर में घुसकर जवाब देता है।”इसके बाद प्रधानमंत्री दक्षिण गोवा के कैनाकोना पहुंचे।

यहां गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय के प्रमुख पीठ श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ में उन्होंने विशेष पूजा की। मठ परिसर में बनी भगवान श्रीराम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का लोकार्पण किया, जो अब विश्व की सबसे ऊंची श्रीराम कांस्य प्रतिमा का गौरव रखती है।पीएम ने मठ में नवनिर्मित ‘रामायण थीम पार्क गार्डन’ का भी उद्घाटन किया। इस पार्क में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को भित्ति-चित्रों, मूर्तियों और हरियाली के माध्यम से जीवंत किया गया है।दोनों राज्यों में दिन भर चले इन धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। पीएम का यह दौरा जहां एक ओर भारतीय संस्कृति और आस्था का सम्मान दर्शाता है, वहीं गीता के संदेश को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर उन्होंने एक बार फिर ‘नए भारत’ की छवि को मजबूती दी।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
