नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू करते ही कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों की भौंहें चढ़ा दीं।

पुतिन ने अपने साथ रूस से विशेष विमान से मंगवाई गई हाई-सिक्योरिटी औरस सीनेट लिमोज़ीन को एयरपोर्ट पर ही खड़ा छोड़ दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी ही आधिकारिक कार में सवार होकर राजपथ की ओर रवाना हो गए।दोनों नेताओं का एक ही कार में बैठना न सिर्फ़ असामान्य था, बल्कि रूसी सुरक्षा इतिहास में भी लगभग अभूतपूर्व घटना मानी जा रही है। पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को दुनिया की सबसे कड़ी और जटिल सुरक्षा प्रणालियों में शुमार किया जाता है।

उनकी कार हमेशा रासायनिक-जैविक हमलों से भी सुरक्षित रहती है, दरवाज़े इतने भारी होते हैं कि सामान्य इंसान उन्हें खोल भी नहीं सकता, और गाड़ी में ऑक्सीजन सप्लाई का अपना सिस्टम तक लगा होता है।लेकिन दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर जब प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से पुतिन का स्वागत किया और उन्हें अपनी BMW 7 सीरीज़ में बैठने का इशारा किया, तो रूसी राष्ट्रपति ने बिना एक पल गंवाए सहमति जता दी। दोनों नेता आगे की सीट पर नहीं, बल्कि पीछे की सीट पर कंधे से कंधा मिलाकर बैठे और बातें करते हुए राजधानी की सड़कों पर निकल पड़े।सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि पुतिन की विदेश यात्राओं में उनकी निजी सुरक्षा गाड़ी का इस्तेमाल लगभग अनिवार्य होता है। उनकी टीम खाने-पीने की हर चीज़ की पहले जांच करती है, यहाँ तक कि उनके स्वास्थ्य से जुड़ी अत्यंत निजी जानकारियाँ भी विदेशी धरती पर न रह जाएँ, इसके लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं।एक वरिष्ठ राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह सिर्फ़ कार बदलने की बात नहीं है, यह भरोसे की पराकाष्ठा है।

पुतिन ने भारत और ख़ासकर मोदी में जो विश्वास दिखाया, उसकी मिसाल दुनिया में दुर्लभ है।”सूत्रों के अनुसार, जब रूसी सुरक्षा दल ने इसकी इजाज़त मांगी तो पुतिन ने सिर्फ़ इतना कहा, “यहाँ मैं पूरी तरह सुरक्षित हूँ। नरेंद्र मेरे मित्र हैं।”प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है, जिसमें दोनों नेता एक ही कार की पिछली सीट पर मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं। हैशटैग #ModiPutinBromance और #EkHiCarMein दुनिया भर में ट्रेंड कर रहा है।भारत-रूस संबंधों के लिए यह पल केवल राजनयिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। जब दुनिया दो धड़ों में बंटी हुई है, तब दो शक्तिशाली नेता एक कार में सवार होकर यह संदेश दे रहे हैं कि कुछ रिश्ते प्रोटोकॉल से ऊपर होते हैं।
