इंदौर – मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी संकट ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है शहर में बैक्टीरिया से संक्रमित पानी के कारण अब तक 15 वीं मौत दर्ज की गई है, जिससे शहरवासियों में भारी चिंता और गुस्सा फैल गया है हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में दावा किया कि मृतकों की संख्या अब तक केवल 4 है, जो स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों से मेल नहीं खाता है इस तथ्य ने मामले को और विवादास्पद बना दिया है और प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैंइस गंभीर स्थिति पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि यह पाप है और इसका घोर प्रायश्चित करना होगा प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए

ताकि और जानें न जाएँ नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए और पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के मामलों में लापरवाही अस्वीकार्य है इंदौर के पुराने जल नेटवर्क, टूटी-फूटी पाइपलाइनें और गंदे टैंकों के कारण पानी बैक्टीरिया और संक्रमण के लिए संवेदनशील हो गया है लगातार पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी और सफाई की कमी ने संकट को और बढ़ा दिया है स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल स्रोतों की जांच और कीटाणुशोधन का काम चल रहा है, लेकिन परिणाम अभी तक संतोषजनक नहीं हैं नगर निगम ने कहा कि सभी प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय किया गया है और पीने के पानी के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं

अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि मृतकों की संख्या और स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है इसके बावजूद शहरवासियों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है और लोग प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जता रहे हैं सामाजिक मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं और मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं नागरिकों का कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह संकट और गंभीर हो सकता है यह संकट केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और शहर की जल सुरक्षा की गंभीर परीक्षा भी है इंदौर में पानी की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान न देना पिछले कई वर्षों से समस्या रहा है और अब यह मुद्दा जानलेवा रूप ले चुका हैइंदौर में यह पानी संकट, जनता के गुस्से और प्रशासन के आंकड़ों के बीच टकराव के कारण, पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है

उमा भारती का यह बयान और हाईकोर्ट में सरकार की स्थिति इस मामले को और संवेदनशील बना रही है तत्काल प्रभावी कदम उठाए बिना और निगरानी बढ़ाए बिना स्थिति और भयावह हो सकती है इस संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जल आपूर्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर लापरवाही कितना बड़ा खतरा बन सकती है नागरिकों की जान और सुरक्षा सर्वोपरि है, और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाएं
