ब्राज़ील में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को तख्तापलट की साजिश हिंसा भड़काने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को उलटने की कोशिश जैसे गंभीर आरोपों में 27 साल 3 महीने की सज़ा सुनाई है। यह फैसला देश के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ इतना कड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद मंगलवार देर रात बोल्सोनारो को ब्रासीलिया के फेडरल पुलिस हेडक्वार्टर में हाई-सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट किया गया, जहां से उनकी सजा की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है।मामला 2022 के चुनावों से जुड़ा है, जहां बोल्सोनारो राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा से हार गए थे। हार स्वीकार करने के बजाय उन्होंने चुनावी परिणामों को ‘धांधली’ बताया और अपने समर्थकों के बीच हिंसा और अविश्वास फैलाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि बोल्सोनारो और उनके करीबी सैन्य अधिकारियों ने सत्ता में बने रहने के लिए एक संगठित योजना बनाई थी, जिसमें राजधानी ब्रासीलिया के मुख्य सरकारी भवनों पर कब्जा, सेना को हस्तक्षेप के लिए उकसाना और न्यायालय पर दबाव बनाने का प्लान भी उसमें शामिल था।सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ विरोध-प्रदर्शन का मामला नहीं था,

बल्कि लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश थी। अदालत ने पाया कि बोल्सोनारो ने जानबूझकर एक ऐसा माहौल बनाया जिसका उद्देश्य सरकार पटलने और सत्ता हथियाने का था।अदालत ने एक प्रकार का सशस्त्र अपराधी संगठन बनाया था, जिसमें सेना के पूर्व अधिकारी, उनके राजनीतिक सहयोगी और सुरक्षा सलाहकार भी उसमें शामिल थे। यह संगठन चुनावी प्रक्रिया पर अविश्वास फैलाकर ध्रुवीकरण करने और ज़रूरत पड़ने पर हिंसा कराने की तैयारी में जुटा था। अदालत का कहना है कि यह योजना बहुत संगठित थी, जिसमें न्यायाधीशों, विरोधी नेताओं और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाने की साजिश भी शामिल थी।जांच में पता चला कि 2023 की शुरुआत में राजधानी पर हमले की कोशिश के पीछे भी यही गुट था, जब हजारों समर्थकों ने संसद, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन में घुसकर तोड़फोड़ की थी। अदालत ने इसके लिए बोल्सोनारो को मुख्य प्रेरक और नेतृत्वकर्ता बताया है 27 साल की सजा सुनाए जाने के बाद बोल्सोनारो ने अपील की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को नवंबर में खारिज कर दिया था इसके बाद उन्हें अगस्त 2025 से घर पर ही नजरबंद रखा गया था। नजरबंदी के दौरान उनके एंकल मॉनिटर से छेड़छाड़ का पता चला, जिससे संदेह हुआ कि वे देश छोड़कर भागने की तैयारी कर रहे हैं।अदालत ने तुरंत आदेश देते हुए कहा कि बोल्सोनारो को प्री-वेंटिव कस्टडी में लिया जाए और सजा शुरू कराई जाए। 22 नवंबर की रात पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लियाकोर्ट ने सिर्फ बोल्सोनारो को ही नहीं,

बल्कि उनके करीबियों को भी दोषी पाया है।# पूर्व रक्षा मंत्री को 25 साल# नौसेना प्रमुख को 20 साल# न्याय मंत्री को 16 साल# सुरक्षा सलाहकार को भी 19 साल की सज़ा हुई है।सभी पर राज्य-विरोधी गतिविधियों, सत्ता हथियाने की योजना और हिंसा फैलाने का आरोप साबित हुआ है इस से जनता का नेता बनाम लोकतंत्र का दुश्मन देश में तनाव बढ़ गया है बोल्सोनारो का राजनीतिक प्रभाव अभी भी ब्राज़ील में काफी बड़ा है। उनके समर्थक उन्हें जनता का सच्चा नेता बताते हैं। उनका कहना है कि यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध है और इसका उद्देश्य उन्हें फिर से सत्ता में आने से रोकना है। दूसरी ओर लोकतंत्र समर्थक समूह और वकील इस फैसले को ब्राज़ील के इतिहास का सबसे साहसी न्यायिक निर्णय फासिज़्म के खिलाफ जीत और लोकतंत्र की रक्षा बता रहे हैं।चूंकि बोल्सोनारो 2030 तक चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए आने वाली चुनावी राजनीति में यह फैसला बहुत बड़ा असर डालेगा। विपक्षी पार्टियां इसे लोकतंत्र की मजबूती मान रही हैं, जबकि उनके समर्थक इसे न्यायपालिका का दुरुपयोग बता रहे हैं।
