नई दिल्ली -दिवाली को संयुक्त राष्ट्र सांस्कृतिक संस्था UNESCO ने बुधवार को अपनी Intangible Cultural Heritage यानी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कर लिया। इस फैसले को भारत की सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा और विश्व को जोड़ने वाला संदेश है UNESCO ने दिवाली को आधिकारिक रूप से अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में जोड़ा गया है यह मान्यता global level पर एक त्योहार को सांस्कृतिक परंपरा, सामूहिक पहचान और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक मानते हुए दी जाती है

दिवाली अब उन भारतीय परंपराओं की सूची में शामिल हो गई है जिनमें पहले ही कुंभ मेला, योग, दुर्गा पूजा, नवरोज, रामलीला, नृत्य कलाएँ और कुल 15 भारतीय धरोहरें शामिल हैं UNESCO की समिति ने यह निर्णय लिया, जबकि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने इसे भारत की सांस्कृतिक जीत बताया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक शक्ति का वैश्विक सम्मान कहा है यह फैसला दिसंबर 2025 की को UNESCO की सत्र बैठक में लिया गया, जिसके तुरंत बाद भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ जारी कीं।यह सूची UNESCO के मुख्यालय द्वारा घोषित की गई भारत में दिल्ली, वाराणसी, अयोध्या और कई शहरों में इस घोषणा का स्वागत करते हुए विशेष कार्यक्रम और इसे सांस्कृतिक सम्मान बताया गया है UNESCO के अनुसार दिवाली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है। यह रोशनी, सद्भाव, अच्छाई की जीत और सामूहिक उत्सव का संदेश देती है

दिवाली दुनिया के कई देशों में मनाए जाने वाले सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन चुकी है इसके वैश्विक प्रभाव, भारतीय डायस्पोरा की भूमिका और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के कारण इसे यह स्थान दिया गया भारत सरकार ने दिवाली को विश्व अमूर्त धरोहर सूची में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया था।इसमें इसके इतिहास, परंपराओं, सामाजिक महत्व और सामूहिक सांस्कृतिक भूमिका का विस्तृत दस्तावेज UNESCO को भेजा गया इस प्रस्ताव का मूल्यांकन किया और फिर समिति ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया इसके बाद सूची में दिवाली को औपचारिक रूप से जोड़ा गया है

दिवाली के UNESCO धरोहर बनने से भारत की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिली है यह केवल एक त्योहार का वैश्विक सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, परंपरा और आध्यात्मिकता के मूल्यों का विश्व स्तर पर स्वीकार है प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में बोले कि दिवाली हमारी संस्कृति की आत्मा है और आज दुनिया ने इस रोशनी को पहचाना है
