कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीति इन दिनों काफी गर्म है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता, सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार, सत्ता की कुर्सी को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। हाल ही में शिवकुमार ने संकेत दिए कि अब वे मुख्यमंत्री बनने के हकदार हैं। वहीं सिद्धारमैया ने कहा कि जनता ने उन्हें पूरे पाँच साल के लिए चुना है और उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना सही नहीं होगा।इस विवाद ने पार्टी हाईकमान को भी परेशान कर दिया। कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है पहले आपसी मतभेद खत्म।करो फिर दिल्ली आओ।कर्नाटक में 2023 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी।

उस समय चर्चा थी कि सत्ता के लिए रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूला होगा। इसका मतलब था कि पहले 2.5 साल मुख्यमंत्री पद किसी एक नेता को मिलेगा और फिर दूसरे नेता को मौका मिलेगा।डी.के. शिवकुमार और उनके समर्थक मानते हैं कि अब समय आ गया है। उन्होंने कहा कि रोटेशनल फॉर्मूला के तहत अब उन्हें मुख्यमंत्री होना चाहिए। दूसरी ओर सिद्धारमैया का कहना है कि उनके पास जनता का पूर्ण मांडेट है और वे पूरे पाँच साल मुख्यमंत्री रहेंगे।इस बीच, सिद्धारमैया ने शनिवार को अपने घर कावेरी में शिवकुमार को ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया। ब्रेकफास्ट में दोनों नेताओं ने सामान्य बातचीत की और पार्टी के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई।

सिद्धारमैया ने कहा कि बैठक अच्छी रही, हालांकि कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। शिवकुमार ने भी भरोसा दिलाया कि वे हाईकमान के निर्देशों का पालन करेंगे और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।कांग्रेस हाईकमान ने साफ कहा कि पहले मतभेद सुलझाओ, उसके बाद ही दिल्ली का दौरा किया जाएगा आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस किस दिशा में जाती है।

क्या रोटेशनल फॉर्मूला लागू होगा, या सिद्धारमैया पूरे पाँच साल मुख्यमंत्री रहेंगे। लेकिन एक बात तय है कि कर्नाटक की राजनीति और कांग्रेस के भविष्य के लिए यह मोड़ बहुत अहम है।
रिपोर्ट
अमित कुमार
