ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दो दिवसीय सीमांचल दौरे के दौरान नीतीश कुमार सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है। हालांकि वर्तमान आंकड़ों में नीतीश कुमार को AIMIM के 5 विधायकों की जरूरत नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा पर दबाव कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार अभी भाजपा के दबाव में ज्यादा दिख रहे हैं। पहली बार उन्हें गृह मंत्रालय छोड़ना पड़ा। ओवैसी का यह बयान नीतीश के लिए “दूसरी खिड़की” खोलने जैसा है। अगर कभी भाजपा से नाता टूटा तो JDU (85) + RJD (25) + कांग्रेस (6) + AIMIM (5) + लेफ्ट (3) + अन्य (2) = 126 विधायक आसानी से जुट सकते हैं, जो बहुमत (122) से 4 ज्यादा है।
ओवैसी का समर्थन सिर्फ शाबाशी नहीं, नीतीश के लिए ‘प्लान-B’ का इशारा है:-

असदुद्दीन ओवैसी ने भले ही कहा कि वे नीतीश सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, लेकिन इसका समय और संदेश दोनों महत्वपूर्ण हैं। नीतीश कुमार भाजपा के साथ हैं, फिर भी पहली बार गृह मंत्रालय उनके पास नहीं है। भाजपा ने विजय सिन्हा को डिप्टी CM बनाकर अपना दबदबा दिखाया है।
ऐसे में ओवैसी का यह बयान नीतीश को याद दिला रहा है कि भाजपा के अलावा भी विकल्प मौजूद हैं। सीमांचल में मुस्लिम वोटों का विभाजन करके महागठबंधन को नुकसान पहुंचाने के बाद अब ओवैसी नीतीश को “सेक्यूलर विकल्प” का ऑफर दे रहे हैं। यह नीतीश के लिए भावी राजनीति में उपयोगी हो सकता है।
सीमांचल में मुस्लिम वोट कैसे खिसका? आंकड़ों में समझिए:-
CSDS-लोकनीति के सर्वे के अनुसारः
– 2020: 76% मुस्लिमों ने महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) को वोट दिया
– 2025: सिर्फ 70% (6% की गिरावट)
– AIMIM को मिले 9% मुस्लिम वोट (2020 से 3% ज्यादा)
परिणामः
सीमांचल की 24 सीटों में से:
– 2020 में महागठबंधन: 7 सीटें
– 2025 में महागठबंधन: सिर्फ 5 सीटें
– AIMIM: 5 सीटें (बायसी, अमौर, कोचाधामन, बहादुरगंज, जोकीहाट)
कस्बा (कांग्रेस), प्राणपुर और शेरघाटी (RJD) में AIMIM के कैंडिडेट तीसरे-चौथे नंबर पर रहकर भी वोट काटने में सफल रहे।
नीतीश को ओवैसी का तोहफा: 5 विधायकों का समर्थन, भाजपा पर प्रेशर कम?

सीमांचल दौरे पर आए AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में नीतीश कुमार सरकार को बाहर से समर्थन देगी।
हालांकि अभी नीतीश को इन 5 विधायकों की जरूरत नहीं है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे 2026-27 के लिए नीतीश का बैकअप प्लान बता रहे हैं। अगर कभी NDA टूटा तो JDU + महागठबंधन + AIMIM मिलकर आसानी से 126 का आंकड़ा छू लेंगे।
साथ ही सीमांचल में AIMIM ने महागठबंधन से मुस्लिम वोट खींचकर 5 सीटें जीतीं और कई सीटें हारने में अहम भूमिका निभाई। अब वही ओवैसी नीतीश को समर्थन दे रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह नया ट्विस्ट माना जा रहा है।
ओवैसी ने नीतीश को दे दिया ‘ऑक्सीजन’, अब भाजपा की बेचैनी बढ़ेगी:-

असदुद्दीन ओवैसी ने दो दिन के सीमांचल दौरे में जो तीर छोड़ा है, उसकी गूंज पटना से दिल्ली तक सुनाई दे रही है। नीतीश कुमार को भले अभी AIMIM के 5 विधायकों की जरूरत न हो, लेकिन ओवैसी ने यह संदेश साफ दे दिया है कि “मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा मेरे पास है और मैं उसे आपके साथ जोड़ सकता हूँ”।
यह नीतीश के लिए भाजपा के दबाव से निकलने का एक भावी रास्ता है। 2020 में जहां नीतीश सेक्यूलर खेमे में थे, 2025 में भाजपा के साथ हैं, लेकिन मुस्लिम नाराजगी अब भी बरकरार है। ओवैसी ने पहले वोट काटे, अब समर्थन दे रहे हैं। यह राजनीति का क्लासिक “दुश्मन का दुश्मन दोस्त” वाला फॉर्मूला है।
नीतीश अब भाजपा को बता सकते हैं – “मेरे पास विकल्प है”। यही एक बयान बिहार की सत्ता की हवा बदल सकता है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
