दिल्ली में को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, मंगलवार को 10वी में पढ़ने वाले छात्र ने राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन से कूदकर आत्महत्या कर ली। छात्र द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट न सिर्फ उसके दर्द की कहानी बयां करता है, बल्कि स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की कथित अनदेखी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। मंगलवार दोपहर छात्र राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन से कूद कर खुदकुशी कर लिया । मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हैछात्र के पास से मिले सुसाइड नोट में उसके स्कूल के कई शिक्षकों और प्रिंसिपल पर मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) का सीधा आरोप लगाया गया है।सुसाइड नोट के और हिस्से में दर्द में डूबे शब्द थे कि उसने कई ऐसी बातें लिखीं जिनसे समझ आता है कि वह अंदर ही अंदर टूट चुका था:“मैंने कोशिश की थी कि सुधार कर सकूं, लेकिन मेरी कोशिशों का कोई मतलब नहीं रखा गया। मेरे दोस्त भी अब मुझसे दूर हो गए हैं, क्योंकि टीचर्स मुझे हमेशा गलत बताते हैं। मैं अकेला पड़ जाता हू
कोई मेरी बात समझता ही नहीं।”“मैं थक गया हूं।”उसके शब्दों में सचमुच मदद की पुकार छिपी थी, जो शायद किसी ने नहीं सुनीउसे छोटी-छोटी बातों पर बार-बार डांटा जाता था।वह डांस/ड्रामा प्रैक्टिस के दौरान गिरा था, लेकिन शिक्षकों ने कहा कि वह “नाटक” कर रहा है और उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया।दिल्ली का यह मामला एक चेतावनी है कि स्कूल सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा का भी स्थान होना चाहिए।यह छात्र लगातार मदद मांगता रहा, लेकिन उसकी आवाज़ को अनसुना किया गया और उसी अनदेखी ने उसकी जान ले ली।
