भारत के महान मशहूर मूर्तिकार राम सुतार का आज निधन हो गया है उनके निधन की खबर ने कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ा दी है राम सुतार की मूर्तियां केवल पत्थर और धातु की आकृतियां नहीं थीं, बल्कि उनके भीतर भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रवाद की आत्मा बसी हुई थी उनकी कलाकृतियों में भावनाओं की गहराई, शिल्प कौशल और वास्तविकता का ऐसा मिश्रण था जो देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता थाराम सुतार का नाम जब कला और मूर्तिकला की बात आती है, तो स्वाभाविक रूप से सबसे पहले स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी और संसद की गांधी प्रतिमा याद आते हैं। उन्होंने सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय मूर्तिकला को नई पहचान दी स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के निर्माण में उनकी टीम के साथ उनका योगदान अद्वितीय रहा 182 मीटर की विशाल मूर्ति में हर विवरण पर उनकी सटीक निगरानी और कला का जादू देखने को मिलता था.

सिर्फ़ स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी ही नहीं, बल्कि संसद भवन में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा भी उनके जीवन की अमूल्य कृति मानी जाती है उनके हाथों बनी हर मूर्ति में भावनाओं की गहराई झलकती थी उन्होंने कई ऐसे शिल्प तैयार किए जो इतिहास और आधुनिकता का संगम थे राम सुतार ने मूर्तिकला के क्षेत्र में जितनी प्रतिभा दिखाई, उसने आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया राम सुतार का करियर कई दशक लंबा रहा वे छोटे मूर्तिकला प्रोजेक्ट्स से लेकर बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्मारकों तक काम कर चुके थे उनकी कलाकृतियों में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीरों, सामाजिक विचारकों और आधुनिक भारतीय जीवन की झलक मिलती थी मूर्तिकार के रूप में उन्होंने न केवल पत्थर, ब्रॉन्ज और कांसे में कला दी, बल्कि देशवासियों के दिलों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी कला जगत में उनके योगदान को देखते हुए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान भी उन्हें मिल चुके थे उन्होंने नई पीढ़ी के मूर्तिकारों को प्रशिक्षण दिया और कला को संजोने का संदेश भी दिया उनके निधन से सिर्फ परिवार ही नहीं,

बल्कि पूरा देश और कला जगत शोक में डूबा है राम सुतार के निधन की खबर मिलते ही कला प्रेमियों, संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने उनके योगदान को याद किया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके बनाए स्मारक और मूर्तियां हमेशा भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बनी रहेंगी विशेष रूप से युवा कलाकारों और मूर्तिकारों के लिए राम सुतार का जीवन प्रेरणा का स्रोत रहा उन्होंने यह साबित किया कि मूर्तिकला केवल कला का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और संस्कृति को जीवित रखने का एक सशक्त तरीका भी हैउनके निधन से खाली हुई जगह को भर पाना मुश्किल होगा लेकिन उनकी मूर्तियां, उनकी कला और उनका दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी, संसद की गांधी प्रतिमा और अन्य उनकी कई कलाकृतियां हमेशा उन्हें याद दिलाती रहेंगीराम सुतार ने दिखाया है कि मूर्तिकला सिर्फ़ हाथों की मेहनत नहीं, बल्कि दिल और सोच की गहराई से बनाई जाती है उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। देश उन्हें हमेशा याद रखेगा और उनके बनाए स्मारक उनकी अमर विरासत के रूप में सदैव जीवित रहेंगे
