बिहार की सियासत में एक बार फिर वही पुराना बंगला सुर्खियों में है, जिसे लोग “राबड़ी आवास” के नाम से जानते हैं।

पटना के 10 सर्कुलर रोड पर स्थित यह विशाल सरकारी बंगला पिछले 28 साल से लालू प्रसाद यादव के परिवार का आशियाना रहा है। मंगलवार को बिहार भवन एवं निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को इस बंगले को खाली करने का नोटिस थमा दिया।

यह पहला मौका नहीं है जब लालू परिवार को अपने बंगले से बेदखली की धमकी मिली हो – ठीक 20 साल पहले भी यही नाटक हुआ था, बस उस समय रोल उलटे थे।
1997 से 2025 तक: बंगले की पूरी कहानी-
25 जुलाई 1997:

चारा घोटाला मामले में गिरफ्तारी तय देख लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनवा दिया।
30 जुलाई 1997:

लालू जेल चले गए, लेकिन 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला परिवार के पास ही रहा।
1997-2005: राबड़ी देवी तीन बार मुख्यमंत्री बनीं। इस दौरान आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री निवास 1 अणे मार्ग था, लेकिन लालू परिवार ने 10 सर्कुलर रोड को ही अपना मुख्य ठिकाना बनाए रखा।
फरवरी 2005: नीतीश कुमार पहली बार (कुछ महीनों के लिए) मुख्यमंत्री बने। राबड़ी देवी सत्ता से बाहर हुईं।
24 नवंबर 2005:

नीतीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। अब राबड़ी देवी को 1 अणे मार्ग (मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास) खाली करना था।
2005 का ड्रामा: राबड़ी देवी ने तय समय में 1 अणे मार्ग नहीं छोड़ा। भवन निर्माण विभाग ने सख्त नोटिस भेजा – “7 दिन में खाली करें वरना जबरन बेदखल कर दिया जाएगा”। आखिरकार 1 अणे मार्ग खाली हुआ और राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री कोटे से 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला ही स्थायी रूप से आवंटित कर दिया गया। तब से आज तक यानी पूरे 20 साल से लालू परिवार यहीं रह रहा है।
2025 में फिर वही नोटिस, नया पता:

मंगलवार को भवन निर्माण विभाग ने फिर नोटिस जारी किया। इस बार कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर राबड़ी देवी को अब विधान परिषद कोटे का बंगला (पटना केन्द्रीय पुल के पास हार्डिंग रोड, आवास संख्या-39) आवंटित किया जा रहा है, इसलिए 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला तुरंत खाली किया जाए।
लालू परिवार का तीखा जवाब:-
तेजप्रताप यादव (लालू के बड़े बेटे):

“छोटे भाई (नीतीश कुमार) ने शपथ लेते ही बड़े भाई (लालू) का बंगला खाली करवाने का फरमान सुना दिया। 28 साल से जिस घर से लाखों कार्यकर्ताओं का भावनात्मक रिश्ता जुड़ा था, उसे एक सरकारी कागज ने उजाड़ दिया। नीतीश-लालू के भैयारी रिश्ते का भी अंत हो गया। इतिहास नीतीश कुमार के दोनों हाथों में कालिख लिए इंतज़ार कर रहा है।”

रोहिणी आचार्या (लालू की बेटी, जिन्होंने पिता को किडनी दी): ठीक 12 दिन पहले यानी 15 नवंबर को रोते-धोते इसी बंगले को छोड़कर दिल्ली चली गई थीं। अब फिर पूरा परिवार बेघर होने की कगार पर है।-
राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल:

“किसी भी कीमत पर राबड़ी आवास नहीं छोड़ा जाएगा। यह लालू परिवार को अपमानित करने की सोची-समझी साजिश है। नीतीश कुमार 20 साल से मुख्यमंत्री हैं, अब जाकर याद आया?”
बीजेपी-जेडीयू खेमे की बयानबाजी:-
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह:

“बिहार में कानून का राज है। सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं। लालू हों, राबड़ी हों या कोई और – कानून के दायरे में रहना होगा। नहीं खाली किया तो पुलिस हटा देगी।”
बीजेपी नेता नीरज कुमार (तंज कसते हुए):
“जब राबड़ी देवी बंगला खाली करेंगी तो टोंटी, नल, पंखे चोरी न हो जाएं, इसका विशेष ध्यान रखें।”
अभी बंगले में कौन-कौन रह रहा है ? :-
फिलहाल 10 सर्कुलर रोड में – लालू प्रसाद यादव – राबड़ी देवी – तेजस्वी यादव, उनकी पत्नी राजश्री और बेटी कात्यायिनी – मीसा भारती (कभी-कभार) तेजप्रताप यादव को लालू ने पहले ही पार्टी और परिवार से बाहर का रास्ता दिखा चुका है, इसलिए वह अलग रहते हैं।
आगे क्या ? :-

राजद के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह नोटिस सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के बीच पिछले 30 साल के सियासी रिश्ते को खत्म करने की आखिरी कोशिश है। पार्टी कानूनी और सड़क दोनों मोर्चों पर इस फैसले का विरोध करेगी।
दूसरी तरफ सरकार का साफ कहना है –
“नियम सबके लिए एक समान हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री कोटे का ही बंगला मिलेगा।”अब देखना यह है कि 2005 वाला इतिहास दोहराया जाएगा या इस बार लालू परिवार बंगला बचाने में कामयाब हो पाएगा। फिलहाल बिहार की सियासत में एक ही सवाल गूंज रहा है – बंगला जाएगा या भैयारी बच जाएगी?
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
