
नीतीश कुमार की नई सरकार बनते ही बिहार में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का सिलसिला जोरों पर है। कोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रशासन अब पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा। मंगलवार को बेगूसराय जिले में सुबह-सुबह बुलडोजर गरजे और लोहिया नगर के पास सैकड़ों झोपड़ियां व छोटी-छोटी दुकानें मिट्टी में मिला दी गईं। जेल रोड तक का पूरा इलाका साफ कर दिया गया।
स्थानीय लोगों ने हाथ जोड़कर, रोकर-गिड़गिड़ाकर बुलडोजर रोकने की कोशिश की, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात था। किसी की एक न चली। कुछ घंटों में ही पूरा इलाका कंक्रीट के मलबे और बिखरे हुए घरेलू सामान का ढेर बन गया
नालंदा में पप्पू यादव का धमाकेदार ऐलान – “बुलडोजर मेरी लाश पर से गुजरेगा” :-

इसी बीच नालंदा जिले के रहुई प्रखंड के शिवनंदन नगर में माहौल और गमगीन हो गया। यहां महादलित परिवारों को सरकारी जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है। 5 दिसंबर की डेडलाइन दी गई है। जैसे ही पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव वहां पहुंचे, महिलाएं-बच्चे उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगे।
पप्पू यादव ने मौके पर ही प्रशासन को खुलेआम चेतावनी दे डाली:-

“अगर 5 तारीख को इन गरीबों के घर गिराने की हिम्मत की गई, तो बुलडोजर मेरे शव के ऊपर से होकर गुजरेगा। मैं इनके सामने खड़ा रहूंगा।”
सांसद ने तुरंत 8 सबसे ज्यादा प्रभावित परिवारों को दस-दस हजार रुपये की नकद मदद भी दी और कहा कि ये सिर्फ शुरुआत है, पूरी लड़ाई लड़ी जाएगी।
“चौथी पीढ़ी से रह रहे लोग, फिर भी अवैध?”
पप्पू यादव ने सवालों की झड़ी लगा दी –
– ये लोग यहां 70-80 साल से रह रहे हैं, उनकी चौथी-पांचवीं पीढ़ी यहीं पैदा हुई।
– इंदिरा आवास यहीं बनवाए गए, सरकारी पैसा सड़क बनाने में लगाया गया।
– लोग बिजली का बिल भर रहे हैं, वोटर लिस्ट में नाम है, राशन कार्ड है।
– अब अचानक यही जमीन अवैध कैसे हो गई?
– जिसने कोर्ट में याचिका डाली, वो खुद गैर-मजरूआ जमीन पर कब्जा करके बैठा है, उसका घर क्यों नहीं गिर रहा?
उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि बुलडोजर सिर्फ पासवान, मांझी, कहार जैसे अति-पिछड़ा और दलित समुदाय के घरों पर ही चल रहा है।
NDA के दलित-महादलित चेहरों पर साधा निशाना:-

पप्पू यादव ने बिना नाम लिए NDA के सहयोगियों चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा पर तीखा हमला बोला –

“जिन्होंने दलित-महादलित और अति-पिछड़ों के नाम पर वोट लिया, आज जब उनके घर उजड़ रहे हैं, तब सब मौन हैं। सिर्फ कुर्सी के लिए राजनीति करते हैं, लोगों की तकलीफ से कोई मतलब नहीं।”
आगे क्या?
बिहार में अभी दर्जनों जिलों में कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ मुहिम चल रही है। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी है, लेकिन सड़क से संसद तक गरीबों की आवाज अब तेज होने लगी है। आने वाले दिन बता पाएंगे कि बुलडोजर की यह रफ्तार रुकेगी या और तेज होगी।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
