अमेरिका के राष्ट्रपति और आगामी चुनावों में फिर से मजबूत दावेदार डोनाल्ड ट्रम्प ने इमिग्रेशन नीति को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है ट्रम्प प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कुल 75 देशों के लिए अमेरिकी वीजा सेवाओं को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है इस प्रस्तावित फैसले का मकसद अमेरिका आने वाले विदेशियों की संख्या में कटौती करना और इमिग्रेशन सिस्टम पर दबाव कम करना बताया जा रहा हैइस सूची में भारत के छह पड़ोसी देश शामिल हैं, जिससे दक्षिण एशिया में इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है

हालांकि भारत का नाम फिलहाल इस लिस्ट में नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसके असर को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैंट्रम्प प्रशासन का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका में इमिग्रेशन का दबाव तेजी से बढ़ा है खासतौर पर ऐसे देशों से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, जहां आर्थिक स्थिति कमजोर है ट्रम्प का तर्क है कि इससे अमेरिका की सरकारी सहायता योजनाओं, रोजगार बाजार और सामाजिक ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव लाया गया है कि जिन देशों से आने वाले आवेदकों की आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर मानी जाती है, वहां नई वीजा प्रोसेसिंग को रोक दिया जाए या बेहद सीमित कर दिया जाए हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से 75 देशों की पूरी सूची जारी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इसमें शामिल हो सकते हैं

पाकिस्तानबांग्लादेशअफगानिस्ताननेपालभूटानम्यांमारइनके अलावा अफ्रीका, मध्य-पूर्व, लैटिन अमेरिका और एशिया के कई देश भी इस फैसले की जद में बताए जा रहे हैंnखासकर वे देश जहां से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, परिवार पुनर्मिलन या स्थायी निवास के लिए अमेरिका जाते हैंप्रस्तावित रोक का सबसे ज्यादा असर इमिग्रेंट वीजा पर पड़ सकता है यानी वे लोग जो अमेरिका में स्थायी तौर पर बसने, ग्रीन कार्ड या फैमिली रीयूनिफिकेशन के लिए आवेदन करते हैं, उन्हें झटका लग सकता है हालांकि टूरिस्ट और बिजनेस वीजा पूरी तरह बंद नहीं होंगे, लेकिन उन पर भी अतिरिक्त जांच और कड़ी शर्तें लागू की जा सकती हैं भारत को फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन भारत के पड़ोसी देशों के शामिल होने से भारतीय वीजा नीति पर भी असर पड़ सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नीति लागू होती है तो रीजन-वाइज स्क्रीनिंग और सख्त हो सकती है

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आलोचनाइस फैसले को लेकर कई देशों में नाराजगी देखी जा रही है मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम भेदभावपूर्ण है और इससे छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और परिवारों के सपनों पर असर पड़ेगावहीं ट्रम्प समर्थकों का तर्क है कि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय नागरिकों को ज्यादा मौके मिलेंगे अगर यह फैसला लागू होता है, तो यह ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम माना जाएगा इस पर व्हाइट हाउस, स्टेट डिपार्टमेंट और प्रभावित देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की उम्मीद है

