
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन शुरू होते ही ऐसा नजारा देखने को मिला कि पूरा सदन और बाहर देख रही जनता एक साथ ठहाका मारकर हंस पड़ी। राज्यपाल मोहम्मद आरिफ मोहम्मद खान जैसे ही अपना अभिभाषण शुरू करने खड़े हुए, अचानक माइक ने धोखा दे दिया। पांच मिनट तक माइक कभी चुप हो जाता, कभी फुसफुसाने लगता, कभी बीच-बीच में आवाज गायब।

सामने की कुर्सी पर बैठे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, स्पीकर नंदकिशोर यादव से लेकर पूरा सदन एक-दूसरे का मुंह ताकने लगा। राज्यपाल साहब ने भी पहले तो हैरानी से इधर-उधर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, मैं आवाज थोड़ी तेज कर देता हूं।” और फिर बिना माइक के सपोर्ट के जोर-जोर से बोलने लगे। उनका यह अंदाज देखकर सदन में कई विधायकों के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

लेकिन असली मजा तो बाहर था। विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण देख रहे दर्शकों ने सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बौछार कर दी। कोई लिख रहा था – “माइक भी भाग गया बिहार से!”, कोई बोला – “विकास की गति देखो, माइक तक नहीं चला।” एक यूजर ने तंज कसा – “ऑडियो टीम को बोनस दो भाई, आज पूरा बिहार सुन रहा है कि कुछ सुनाई नहीं दे रहा।”

एक अन्य दर्शक ने लिखा – “राज्यपाल साहब ने कहा मैं तेज बोलूंगा… अरे सर, तेज बोलने से पहले माइक को तो ठीक करवाइए!” तो किसी ने चुटकी ली – “बिहार में स्मार्ट सिटी बनाने की बात करते हैं, विधानसभा में स्मार्ट माइक तक नहीं है।”
पांच मिनट की इस तकनीकी खराबी ने पूरे सत्र की शुरुआत को यादगार बना दिया। आखिरकार तकनीकी टीम ने माइक ठीक किया और राज्यपाल ने अपना अभिभाषण शांतिपूर्वक पूरा किया। लेकिन सोशल मीडिया पर मीम्स और चुटकुले पूरे दिन चलते रहे। जनता का एक ही सवाल – “जब सदन में आवाज नहीं पहुंच पा रही, तो बाहर तक कैसे पहुंचेगी?”
बहरहाल, बिहार विधानसभा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां राजनीति के साथ-साथ मनोरंजन भी मुफ्त में मिलता है !
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
