नई दिल्ली। भारत की वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक ताकत को लेकर यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट ने बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति भवन में यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में आयोजित विशेष डिनर के दौरान उन्होंने कहा कि भारत आज ग्लोबल पॉलिटिक्स में शीर्ष देशों की श्रेणी में पहुंच चुका है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), वरिष्ठ मंत्री और उच्च अधिकारी मौजूद रहेयूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत की भूमिका केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने वाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया आज जिस तरह के राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी बदलावों से गुजर रही है, उसमें भारत का संतुलित और जिम्मेदार रवैया उसे अन्य देशों से अलग करता हैराष्ट्रपति भवन में हाई-लेवल डिनर डिप्लोमैसीराष्ट्रपति भवन में आयोजित इस डिनर को भारत-यूरोप संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह आयोजन यूरोपीय डेलिगेट्स के सम्मान में रखा गया था,

जहां भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक राजनीति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुईराष्ट्रपति की ओर से स्वागत करते हुए कहा गया कि भारत और यूरोप केवल आर्थिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, बहुलता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस बात का संकेत दिया कि भारत सरकार यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैभारत की बढ़ती वैश्विक साख पर यूरोप की मुहरयूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आज वैश्विक राजनीति में केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाली भूमिका में नजर आ रहा है उन्होंने भारत की जी-20 अध्यक्षता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रियता और वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट रुख की सराहना की।उनका कहना था कि भारत की आर्थिक मजबूती, तकनीकी प्रगति और कूटनीतिक संतुलन ने उसे दुनिया के भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है। यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है, खासकर व्यापार, निवेश, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्रों मेंपीएम और CJI की मौजूदगी के मायनेइस डिनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत है कि भारत-यूरोप संबंध अब सिर्फ कार्यपालिका तक सीमित नहीं, बल्कि संवैधानिक और संस्थागत स्तर पर भी मजबूत हो रहे हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत-यूरोप साझेदारी को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराईवैश्विक राजनीति में भारत की नई पहचानयूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट के बयान को भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह साफ संकेत है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति में प्रभावशाली केंद्र बन चुका है।विश्लेषकों का मानना है कि भारत-यूरोप के मजबूत होते रिश्ते आने वाले समय में न सिर्फ व्यापार और निवेश को बढ़ाएंगे, बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाएंगे। राष्ट्रपति भवन में हुआ यह डिनर भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रतीक बनकर सामने आया है
