नई दिल्ली – देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है सरकार जहां इस योजना को मुफ्त इलाज की गारंटी बताती है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है कई राज्यों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज नहीं मिल रहा और उनसे मोटी रकम वसूली जा रही हैआयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देने का प्रावधान है लेकिन मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल जानबूझकर योजना के तहत इलाज करने से मना कर देते हैं या फिर इलाज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलते है कई मामलों में मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि आयुष्मान का कोटा खत्म हो गया है या यह बीमारी योजना में शामिल नहीं है ,मरीजों की परेशानी:- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से सामने आई शिकायतों में बताया गया है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है

कई अस्पताल पहले मरीज को भर्ती कर लेते हैं और बाद में आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं मजबूरी में परिजन या तो उधार लेकर इलाज कराते हैं या मरीज को किसी सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने को मजबूर होते हैं कुछ मामलों में अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज तो करते हैं, लेकिन दवाइयों, जांच और बेड चार्ज के नाम पर अलग से पैसे वसूलते हैं इसका विरोध करने पर उन्हें इलाज रोकने या डिस्चार्ज करने की धमकी दी जाती है,निजी अस्पतालों की मनमानी:- निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली राशि कम लगती है, इसलिए वे इससे बचने की कोशिश करते हैं कई अस्पताल मरीजों को सामान्य इलाज बताकर भर्ती करते हैं और बाद में महंगे पैकेज थोप देते हैं, जो योजना के दायरे से बाहर बताए जाते हैं

इस योजना से जुड़े नियमों के अनुसार, सूचीबद्ध अस्पतालों को आयुष्मान कार्डधारकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना चाहिए, लेकिन निगरानी की कमी के चलते नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है,सरकार और प्रशासन का रुख:- सरकार का दावा है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज मिला है और गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है इसकी शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पतालों पर जुर्माना लगाया जाता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें योजना से बाहर भी किया जाता है हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी बताई जा रही है कई मामलों में मरीज शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से ही अनजान रहते हैं या इलाज के दबाव में शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पातेविपक्षी दलों ने आयुष्मान योजना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है

उनका कहना है कि कागजों में मुफ्त इलाज की गारंटी दी जा रही है, लेकिन हकीकत में गरीबों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा विपक्ष ने निजी अस्पतालों की मनमानी पर सख्त नियंत्रण और प्रभावी निगरानी तंत्र की मांग की है इस योजना को सफल बनाने के लिए अस्पतालों की नियमित ऑडिट, मरीजों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और आम लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।जब तक निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक मुफ्त इलाज की गारंटी सिर्फ एक दावा बनकर रह जाएगी फिलहाल, आयुष्मान भारत योजना को लेकर उठ रहे ये सवाल सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है
