पटना – बिहार की राजनीति में देर रात उस समय हलचल तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास आधी रात में खाली किया जाने लगा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले ही पटना से बाहर जा चुके थे बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की तैयारी लंबे समय से चल रही थी,

क्योंकि राबड़ी आवास को खाली करने का नोटिस करीब एक महीने पहले ही जारी किया जा चुका था देर रात अचानक आवास पर हलचल देखी गई सामान को बाहर निकाला गया और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ गई, जिससे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है सरकार की ओर से राबड़ी देवी को आवास खाली करने के लिए निर्धारित समय सीमा दी गई थी नोटिस मिलने के बाद भी काफी समय तक आवास खाली नहीं किया गया,

जिसके बाद प्रशासन की सख्ती बढ़ी इसी क्रम में देर रात आवास खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है RJD के नेताओं का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों और प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है यह महज नियमों के तहत की गई कार्रवाई है और इसमें किसी तरह की राजनीति नहीं है तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव का पटना से बाहर होना भी इस खबर को और अहम बना रहा है पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता पहले से तय कार्यक्रम के तहत शहर से बाहर गए थे, लेकिन उनके बाहर रहने के दौरान आवास खाली किए जाने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं

विपक्ष इसे सत्ता का दबाव बता रहा है, जबकि सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दे रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राबड़ी आवास का खाली होना बिहार की सियासत में एक प्रतीकात्मक घटना भी हो सकती है यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर हैं आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक सियासी घमासान देखने को मिल सकता हैफिलहाल, राबड़ी आवास खाली होने के बाद इलाके में शांति है, लेकिन राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि RJD इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती है और सरकार इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है
