बिहार के सोनपुर मेले में इस बार एक भयावह मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के नाम से प्रसिद्ध सोनपुर मेला, जिसे पारंपरिक रूप से धार्मिक सांस्कृतिक और पशु व्यापार के लिए जाना जाता था, इस बार मानव शोषण और अश्लीलता के विवाद में सामने आया है । मेले में लगे कई थिएटर और ऑर्केस्ट्रा समूहों में लड़कियों जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थीं, लड़कियों को न सिर्फ मजबूरन डांस करवाया जाता था बल्कि शारीरिक शोषण और अश्लीलता का दबाव भी डाला जाता था। एक रेस्क्यू डांसर ने अपनी दहशत भरी कहानी सुनाते हुए कहा कि पीरियड में भी हमें डांस करना पड़ता था और कहा जाता था

कि अपने प्राइवेट पार्ट्स एक्सपोज कर दो यह बयान समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी साबित हो रहा है।26 नवम्बर 2025 की देर रात, सारण पुलिस ने एसएसपी के निर्देशन में मेले के हरिहरनाथ क्षेत्र में लगे कई थिएटर और आर्केस्ट्रा मंडपों पर छापेमारी की यह कार्रवाई उस सूचना के बाद हुई थी जिसमें एक नाबालिग लड़की के शोषण की खबर मिली थी। पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने थिएटरों की घेराबंदी की और पाँच लड़कियों को सुरक्षित वहां से बाहर निकला गया इन लड़कियों में दो उत्तर प्रदेश की।एक मध्य प्रदेश की, एक छत्तीसगढ़ की और एक नेपाल की बच्ची भी इसमें शामिल थीं। इस मामले को लेकर हरिहरनाथ थाना में FIR दर्ज की गई है

और जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि ये लड़कियां मेले तक किसी तस्करी नेटवर्क के माध्यम से लाई गई थीं और उनका डांस करना या प्रदर्शन करना उनके लिए मजबूरी बन गया था।पीड़ितों की कहानी भयावह है। उन्हें बिना मर्जी के सार्वजनिक मंचों पर छोटे कपड़े पहनकर डांस करना पड़ता था यहां तक कि मासिक धर्म के दिनों में भी उन्हें डांस के लिए मजबूर किया जाता था और शोषण करने वाले उनसे कहते थे कि अपने प्राइवेट पार्ट्स एक्सपोज करो जो लड़कियां मना करती थीं, उन्हें धमकाया जाता या भविष्य में बदनाम करने की धमकी दी जाती थीसोनपुर मेला जो परंपरागत रूप से पशु व्यापार, धार्मिक उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए प्रसिद्ध था पिछले कुछ वर्षों में बदलता हुआ देखन को मिल रहा है

मेले में आने वाले थिएटर अब डांस ऑर्केस्ट्रा रात्री डांस शो और भोजपुरी स्टेज शो का मंच बन गए थे। पहले जहां लोग पारंपरिक कला और नृत्य देखने आते थे, अब थिएटरों में डांस के नाम पर अश्लीलता और शोषण की गुंजाइश बढ़ गई थी। कई डांसर आर्थिक मजबूरी और गरीबी के कारण थिएटर में काम करने को मजबूर थे लेकिन यही निर्भरता अब उनके लिए खतरा बन गई।इस कांड ने प्रशासन समाज और कानून की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि मेले और थिएटरों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया सख्त करे नियमित निगरानी और अचानक छापेमारी के जरिए शोषण विरोध को रोक सके समाज को चाहिए कि वह पीड़ित लड़कियों को केवल रेस्क्यू करने तक सीमित न रखे बल्कि उन्हें मानसिक सामाजिक और आर्थिक सहायता प्रदान करे। मीडिया, NGOs और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिलकर इस शोषण के खिलाफ आवाज उठानी की जरूरत है

कानून को चाहिए कि ऐसे आयोजनों में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और दोषियों को सख्त सजा दिलाए।सोनपुर मेला, जो सदियों से सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीक रहा है, इस घटना के बाद भय और शोषण का प्रतीक बन गया है। मेले की चमक‑दमक और आधुनिक सुविधाएं आगंतुकों को आकर्षित करती हैं, लेकिन वहीं यह भी दिखाता है कि कहां-कहां बच्चों और युवाओं के साथ अवैध गतिविधियां हो सकती हैं। अब ज़रूरत है जागरूकता सख्त कानून सामाजिक जिम्मेदारी और इंसानियत की ताकि सोनपुर मेला फिर से सिर्फ मेला बने मानव शोषण का मार्केट नहीं
रिपोर्ट
अमित कुमार
