देशभर में मकर संक्रांति का पर्व मंगलवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया इस अवसर पर मंदिरों, तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का तिल के तेल से विशेष अभिषेक किया गया, वहीं प्रयागराज के संगम तट पर करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाई मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का तिल के तेल से अभिषेक करने से रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

पूरे मंदिर परिसर में हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आयाउधर, प्रयागराज में मकर संक्रांति पर संगम स्नान का विशेष महत्व होता है प्रशासन के मुताबिक, सुबह से दोपहर तक करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर दान-पुण्य किया स्नान के बाद लोगों ने तिल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्रों का दान किया भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे और घाटों पर स्वास्थ्य, सुरक्षा व ट्रैफिक की विशेष व्यवस्था रहीमकर संक्रांति के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाया

उन्होंने अपने सरकारी आवास पर गायों को चारा खिलाया और इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं प्रधानमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पशु और मानव के बीच संतुलन का प्रतीक है गायों की सेवा और दान को उन्होंने भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा बताया उनके इस कदम को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।देश के अन्य हिस्सों में भी मकर संक्रांति का उत्सव अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया गया दक्षिण भारत में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी और असम में बिहू के रूप में यह पर्व मनाया गया कई जगहों पर पतंगबाजी का आयोजन हुआ, तो कहीं खिचड़ी और तिल-गुड़ से बने व्यंजनों का वितरण किया गया मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और हवन-यज्ञ किए गएधार्मिक मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है

इसे शुभ काल माना जाता है और इस दिन किया गया दान-पुण्य कई गुना फलदायी माना जाता है यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु हर साल इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने पहुंचते है, मकर संक्रांति पर देशभर में आस्था, परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला महाकाल के अभिषेक से लेकर संगम स्नान और प्रधानमंत्री की परंपरागत पूजा तक, इस पर्व ने भारतीय सांस्कृतिक एकता और धार्मिक आस्था को एक बार फिर मजबूती से प्रदर्शित किया
