भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर एक नया कूटनीतिक बयान सामने आया है पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते टकराव को रोकने में चीन की भूमिका अहम रही है पाकिस्तान के इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर इसलिए क्योंकि चार दिन पहले ही चीन ने दावा किया था कि उसने भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता की है पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान में कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए चीन ने रचनात्मक भूमिका निभाई है अधिकारी के मुताबिक, जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालात तनावपूर्ण हो रहे थे,

तब चीन ने दोनों पक्षों से संवाद कायम रखने और स्थिति को नियंत्रण में रखने की अपील की थी पाकिस्तान का कहना है कि चीन की कूटनीतिक पहल से हालात और ज्यादा बिगड़ने से बचे गौरतलब है कि इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि बीजिंग ने भारत और पाकिस्तान दोनों से संपर्क किया और संयम बरतने पर जोर दिया उस समय चीन के इस दावे को लेकर कई सवाल उठे थे, क्योंकि भारत की ओर से किसी भी तरह की मध्यस्थता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी अब पाकिस्तान द्वारा चीन को क्रेडिट दिए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है पाकिस्तान का यह बयान केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करते हैं ऐसे में पाकिस्तान का चीन की भूमिका को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना बीजिंग के प्रति भरोसे और नजदीकी को दर्शाता है हालांकि भारत की स्थिति इस मुद्दे पर अलग रही है

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही सुलझाना चाहता है और किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता भारत का रुख शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के अनुरूप रहा है, जिसमें दोनों देशों के बीच विवादों को आपसी बातचीत से हल करने की बात कही गई हैराजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चीन का इस तरह खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करना एशिया में उसकी बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का संकेत है हाल के वर्षों में चीन न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी क्षेत्रीय मामलों में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान देना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा हैवहीं, पाकिस्तान के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं इससे पाकिस्तान की विदेश नीति में चीन की अहमियत और ज्यादा उजागर होती है, जबकि कुछ का मानना है कि इससे पाकिस्तान की स्वतंत्र कूटनीतिक छवि पर सवाल उठ सकते हैंभारत-पाकिस्तान तनाव पर चीन को लेकर दिया गया पाकिस्तान का बयान दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ माना जा रहा है आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या चीन भविष्य में भी खुद को इस तरह के क्षेत्रीय विवादों में सक्रिय भूमिका में पेश करता है या नहीं फिलहाल, यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है
