लंदन में भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब खालिस्तान समर्थक तत्वों ने कार्यक्रम के दौरान हंगामा शुरू कर दिया यह प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित हमलों और उनकी सुरक्षा की मांग को लेकर किया जा रहा था बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक तख्तियां और बैनर लेकर एकत्र हुए थे और बांग्लादेशी हिंदुओं की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग कर रहे थेयह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था,

तभी कुछ खालिस्तान समर्थक वहां पहुंचे और भारत विरोधी नारे लगाने लगे उन्होंने खालिस्तान के झंडे लहराए और प्रदर्शन के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की इस अचानक हुई नारेबाजी और उकसावे के चलते कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गईभारतीय प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी देश या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के मानवाधिकारों की रक्षा की आवाज उठाना था खालिस्तान समर्थक तत्वों ने जानबूझकर इस मानवीय मुद्दे को भटकाने की कोशिश की और राजनीतिक एजेंडा थोपने का प्रयास किया इस घटना की जानकारी मिलते ही ब्रिटिश पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया।

पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया हालांकि, इस दौरान किसी के घायल होने या गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई हैभारतीय समुदाय के नेताओं ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विदेशों में बार-बार खालिस्तान समर्थक समूह शांतिपूर्ण कार्यक्रमों को बाधित करने की कोशिश कर रहे है इससे न सिर्फ भारतीय समुदाय की छवि प्रभावित होती है, बल्कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भी भटकता हैप्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय हैnउन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है

हाल के वर्षों में यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में तेजी देखी गई है ये समूह अक्सर भारत से जुड़े कार्यक्रमों या भारतीय समुदाय के आयोजनों को निशाना बनाते हैं, जिससे तनावपूर्ण हालात पैदा होते हैंइस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं कई यूजर्स ने ब्रिटेन सरकार से अपील की कि ऐसे उकसावे वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नफरत फैलाने वालों को खुली छूट न दी जाए, लंदन में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि विदेशों में भारत विरोधी गतिविधियों पर कैसे अंकुश लगाया जाए, ताकि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध और मानवाधिकारों की आवाज को दबाया न जा सके
