राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की अनुमति नहीं दे रहे है यह मोदी सरकार की इनसिक्योरिटी (असुरक्षा) का परिणाम है, क्योंकि सरकार विपक्षी नेताओं को वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण मुलाकातों का हिस्सा बनने से रोक रही है यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, क्योंकि विपक्षी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मिलने और चर्चा करने का अधिकार होना चाहिए यह मोदी सरकार का डर और असुरक्षा को दर्शाता है, जो विपक्षी नेताओं को पुतिन जैसे प्रमुख विदेशी नेताओं से मिलने से रोकती हैयह बयान राहुल गांधी ने उस समय दिया, जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत दौरे पर थे

उनका यह आरोप मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता है और यह दावा करता है कि सरकार विपक्ष के नेताओं को महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संवादों से बाहर रखने की कोशिश कर रही है इस तरह की नीतियां भारत के लोकतंत्र और उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं यह आरोप राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यह मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने और आगामी चुनावों में एक नया मुद्दा प्रदान कर सकता हैअगर विपक्षी नेताओं को विदेशी नेताओं से मिलने का अधिकार नहीं मिलेगा,

तो इससे भारतीय लोकतंत्र की अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा बीजेपी और मोदी समर्थक इसे विपक्ष का एक और राजनीतिक कदम मान सकते हैं, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र और स्वतंत्रता के खिलाफ एक गंभीर कदम के रूप में देख रहा है।
रिपोर्ट
अमित कुमार
