बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सबसे बड़ी झुग्गी‑बस्ती कोराइल में मंगलवार की शाम भयंकर आग लग गई, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी को तहस‑नहस कर दिया है यह झुग्गी‑बस्ती न केवल शहर की सबसे बड़ी है, बल्कि यहाँ गरीबी।रोजगार की कमी और जलवायु पलायन जैसी समस्याओं से जूझते हजारों लोग रहते थे। आग की लपटों ने कुछ ही घंटों में लगभग 1,500 झोपड़ियों को पूरी तरह से तबाह कर दिया और हजारों लोग अचानक बेघर हो गए।आग मंगलवार शाम लगभग 5:20 बजे शुरू हुई, और तुरंत ही झुग्गियों में फैल गई। दमकल विभाग की सात यूनिट्स तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। लेकिन संकरी गलियों और भारी ट्रैफिक के कारण उन्हें आने में करीब 35 मिनट लग गए। बाद में कुल 19–20 फायर सर्विस यूनिट्स ने आग पर काबू पाने के लिए प्रयास किए।

दमकल कर्मियों ने पांच घंटे से अधिक समय तक प्रयास किया।और शाम 10:35 बजे आग पर काबू पाया गया। पूरी तरह आग बुझने में कुल 16 घंटे लगे। अभी तक आग कैसे भड़की, इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चला है, लेकिन अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।आग की वजह से 1,500 से अधिक झोपड़ियाँ पूरी या आंशिक रूप से पूरी तरह जल गईं।इस झुग्गी में करीब 60,000 परिवार झुग्गी‑बस्ती में रहते थे। सौभाग्य से, किसी के मरने की खबर नहीं आई है, लेकिन विस्थापितों की संख्या हजारों में है। प्रभावित लोग खासकर महिलाएँ बच्चे और गर्भवती महिलाएँ रात को खुले में ठंड में गुजारने को मजबूर हुए।

राहत कार्य तुरंत शुरू किए गए जिसमें स्थानीय प्रशासन, NGOs और स्वयंसेवकों ने भोजन पानी प्राथमिक चिकित्सा और अस्थायी आश्रय मुहैया कराया। गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान और देखभाल की व्यवस्था की गई इस हादसे ने यह साफ कर दिया कि झुग्गी‑बस्तियाँ किसी भी छोटे-से चिंगारी से असुरक्षित हैं। कोराइल झुग्गी‑बस्ती में रहने वाले लोग अधिकांशत असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं जैसे रिक्शा‑चालक, सफाई कर्मचारी और दैनिक मजदूर थे आग ने न सिर्फ उनका आश्रय छीन लिया, बल्कि रोज़गार और आजीविका भी प्रभावित हुई। भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए अग्नि सुरक्षा, बेहतर योजना, गलियों की चौड़ाई और पानी‑स्रोत जैसी तैयारियाँ आवश्यक हैं।

हालांकि राहत कार्य शुरू हो चुके हैं, यह केवल तत्काल सहायता है। प्रभावितों को कपड़े, बिस्तर, गद्दे और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भी चाहिए। दीर्घकालीन समाधान के लिए बांग्लादेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को पुनर्वास, अग्नि सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की ठोस योजना बनानी होगी, ताकि ऐसे हादसों से आम लोगों को बचाया जा सके।
