पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र मनरेगा को लेकर आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत गंभीर और भावनात्मक माहौल में हुई इस सत्र के आरंभ में सदन ने सिख इतिहास के चार साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित दी गई मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और विपक्ष के सदस्यों ने खड़े होकर चारों साहिबजादों की शहादत को नमन किया गया इस दौरान सदन में कुछ देर के लिए मौन रखा ,श्रद्धांजलि के बाद कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन इसी बीच सदन की मर्यादा को लेकर एक मामला सामने आया स्पीकर ने भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक को नंगे सिर सदन में मौजूद रहने पर टोका स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधानसभा की गरिमा और परंपराओं का पालन सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है उन्होंने विधायक को सिर ढकने की हिदायत दी और भविष्य में ऐसी लापरवाही न बरतने को कहा स्पीकर की इस टिप्पणी के बाद सदन में कुछ समय के लिए हलचल भी देखने को मिली इसके बाद सदन में मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई

सरकार ने ग्रामीण रोजगार, मजदूरी भुगतान, जॉब कार्ड और केंद्र से मिलने वाले फंड को लेकर अपनी स्थिति रखी सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण पंजाब में मनरेगा के तहत काम प्रभावित हुआ है और मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा वहीं विपक्ष ने राज्य सरकार पर मनरेगा के क्रियान्वयन में खामियां और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली,

लेकिन स्पीकर ने बार-बार हस्तक्षेप कर सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित रखा उन्होंने सभी सदस्यों से शालीन भाषा और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की है मनरेगा पर केंद्रित यह विशेष सत्र श्रद्धांजलि, अनुशासन और राजनीतिक टकराव तीनों कारणों से चर्चा में रहा। चार साहिबजादों को नमन के साथ शुरू हुआ यह सत्र राज्य में रोजगार और ग्रामीण विकास से जुड़े अहम सवालों पर केंद्रित नजर आया है
