रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह दोनों नेता पहले से ही एक दूसरे से परिचित हैं और कई अंतरराष्ट्रीय बैठकों में मिल चुके हैं। इस बार दोनों की बातचीत खास इसलिए थी क्योंकि यह फॉर्मल बैठक नहीं थी बल्कि कार में अचानक हुई दोस्ताना बातचीत थी पुतिन ने AajTak को इंटरव्यू में बताया कि यह बातचीत पूरी तरह sponteneous थी और किसी पहले से तय योजना का हिस्सा नहीं थीकार में हुई बातचीत एक साधारण दोस्ताना बातचीत थी जिसमें कोई कूटनीतिक एजेंडा या मीडिया के लिए ड्रामा नहीं वे बस आम दोस्तों की तरह बातें कर रहे थे बातचीत का उद्देश्य केवल आपसी मित्रता और भरोसा दिखाना था न कि कोई तत्काल समझौता करना था

कार में दोनों नेताओं ने समिट के एजेंडा, द्विपक्षीय रिश्तों, वैश्विक राजनीतिक स्थिति और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की यह बातचीत करीब 45 मिनट से 1 घंटे तक चली और इसमें दोनों नेताओं के बीच गहरा भरोसा और सहज संवाद नजर आया तियानजिन, चीन में SCO समिट के दौरान यह कार राइड सम्मेलन स्थल से होटल तक की थी पुतिन ने कहा कि उन्होंने मोदी को अपनी कार में जाने का न्योता इसलिए दिया क्योंकि मेरी कार वहीं खड़ी थी इसलिए साथ में जानें का विचार आया यह पूरी तरह sponteneous निर्णय था,

इसमें कोई दिखावा या औपचारिकता नहीं था इस बातचीत का संदेश भी था भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ औपचारिक कूटनीति पर नहीं, बल्कि भरोसे और दोस्ती पर आधारित हैं यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने का एक तरीका भी था कि दोनों नेता व्यक्तिगत रूप से एक-दूसरे पर भरोसा करते हैंदोनों नेता कार में सफर के दौरान सहज और दोस्ताना अंदाज में बातचीत कर रहे थे तभी पुतिन ने कहा कि हम बस आम दोस्तों की तरह बातें कर रहे थे

हमारे पास बातचीत के लिए हमेशा कुछ न कुछ होता है कई बार नेता फॉर्मल बैठकों में केवल औपचारिक बातें करते हैं, लेकिन इस कार राइड में बातचीत खुली, ईमानदार और सहज थी और यह बातचीत पहले से तय नहीं थी यह बातचीत सिर्फ समसामयिक विषयों पर थी।15–20 मिनट की कार राइड में हुई यह बातचीत सिर्फ फोटो-ऑप्स नहीं थी यह असली दोस्ती, भरोसे और द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक थापुतिन और मोदी ने जो दोस्ताना और सहज बातचीत की, उसने यह संदेश दिया कि भारत और रूस का रिश्ता केवल औपचारिक समझौतों पर नहीं, बल्कि भरोसे और साझा सोच पर भी आधारित है यह घटना दिखाती है कि असली कूटनीति कई बार फॉर्मल बैठकों से हटकर निजी और अनौपचारिक संवाद में होती है
रिपोर्ट
अमित कुमार
