नई दिल्ली, 1 दिसंबर 2025 देश की संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। सत्र के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए करीब दस मिनट का संक्षिप्त संबोधन दिया। उन्होंने इस सत्र को विकसित भारत के संकल्प को नई गति देने का महत्वपूर्ण मौका बताया और विपक्ष से आग्रह किया कि वह चुनावी परिणामों की कड़वाहट को पीछे छोड़कर रचनात्मक और मुद्दा-आधारित विमर्श में हिस्सा ले।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी डिलीवरी में है और भारत ने दुनिया को यह दिखाया है कि लोकतंत्र केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि परिणाम देने वाली व्यवस्था भी हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र न तो हार की कुंठा का शोर करेगा और न ही जीत के घमंड का उत्सव मनाएगा। बल्कि नए सांसदों को अनुभवी सदस्यों का मार्गदर्शन मिलेगा और सदन में नाटकीयता की जगह नीतिगत गहराई और राष्ट्रहित को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि सत्र के पहले दिन से ही सदन में तल्खी के आसार नजर आ रहे हैं।

विपक्षी गठबंधन इंडिया विशेष रूप से एसआईआर (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट्स), देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल और श्रम सुधार कानूनों (लेबर कोड्स) पर विस्तृत चर्चा चाहता है। वहीं सत्तापक्ष की प्राथमिकता ‘एक राष्ट्र, एक विधान, एक संकेत’ की भावना को मजबूत करने वाली ‘वंदे मातरम’ पर केन्द्रित चर्चा कराने की है। दोनों पक्षों के बीच यह खिंचतान पहले दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल को प्रभावित कर सकती है।
यह सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा यानी कुल 19 कैलेंडर दिनों में 15 कार्य दिवस होंगे। सरकार के एजेंडे में परमाणु ऊर्जा से जुड़ा संशोधन विधेयक सहित लगभग दस नए बिल पेश करने की योजना है। इनमें से कुछ बिल काफी महत्वपूर्ण हैं और इनके पारित होने से ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सुधारों को नया बल मिल सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र 2029 के आम चुनाव से पहले की जमीन तैयार करने वाला आखिरी बड़ा सत्र है। इसलिए सत्तापक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को चमकाना चाहेगा, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के हर मौके की तलाश में रहेगा।

अब देखना यह है कि संसद के भीतर जो ऊर्जा दिखेगी, वह देश को आगे बढ़ाने वाली सकारात्मक ऊर्जा होगी या फिर शोर-शराबे में खर्च हो जाएगी।सत्र की शुरुआत के साथ ही पूरे देश की नजरें संसद पर टिकी हैं।
