मॉस्को/लंदन। रूस की राजनीति में एक बार फिर सनसनीखेज आरोपों ने हलचल मचा दी है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने एक प्रमुख विरोधी को कथित तौर पर ‘एपिबैटिडीन’ नामक बेहद खतरनाक जहर देकर मरवाया हालांकि क्रेमलिन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस दावे को लेकर चर्चा तेज हो गई है बताया जा रहा है कि एपिबैटिडीन एक अत्यंत शक्तिशाली रासायनिक यौगिक है, जो मूल रूप से दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एक विषैले मेंढक की त्वचा से प्राप्त होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पदार्थ तंत्रिका तंत्र पर तीव्र असर डालता है इसकी थोड़ी सी मात्रा भी शरीर में तेज न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि इस जहर के प्रभाव से पहले पीड़ित को लकवे जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, इसके बाद सांस लेने में दिक्कत और अंततः दर्दनाक मौत हो सकती हैमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संबंधित विपक्षी नेता की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जांच में सामान्य विषाक्तता के संकेत नहीं मिले, लेकिन बाद में विदेशी विशेषज्ञों ने कथित तौर पर ‘एपिबैटिडीन’ जैसे यौगिक की आशंका जताई।

हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है रूस में इससे पहले भी विपक्षी नेताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत या बीमार पड़ने की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बन चुकी हैं। पश्चिमी देशों ने अतीत में भी रूसी प्रशासन पर रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं, जिन्हें मॉस्को लगातार राजनीतिक साजिश करार देता रहा है विशेषज्ञों का कहना है कि एपिबैटिडीन सामान्य तौर पर चिकित्सा अनुसंधान में दर्द निवारक क्षमता के अध्ययन के लिए जाना जाता है, लेकिन यह अत्यधिक विषैला भी हो सकता है। इसे नियंत्रित परिस्थितियों के बाहर इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक माना जाता है यदि किसी राजनीतिक हत्या में ऐसे दुर्लभ जहर के इस्तेमाल की पुष्टि होती है,

0तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के लिहाज से गंभीर मामला बन सकता है फिलहाल इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है। कई मानवाधिकार संगठनों ने पारदर्शी जांच की अपील की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उधर, रूस सरकार का कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इन आरोपों ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर रासायनिक हथियारों और विषाक्त पदार्थों के कथित इस्तेमाल पर बहस छेड़ दी है
