
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। सोमवार को पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के दौरान एक महिला डॉक्टर नुसरत परवीन के चेहरे से हिजाब हटाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में सीएम नीतीश कुमार महिला डॉक्टर की ओर इशारा करते हुए पूछते दिख रहे हैं- “ये क्या है जी?” इसके बाद महिला ने जवाब दिया कि “हिजाब है सर”। फिर मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथ से हिजाब नीचे खींच दिया। इस घटना से महिला डॉक्टर कुछ पल के लिए असहज नजर आईं।

यह कार्यक्रम पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में आयोजित किया गया था, जहां कुल 1283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें 685 आयुर्वेदिक, 393 होम्योपैथिक और 205 यूनानी चिकित्सक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मंच से 10 डॉक्टरों को खुद नियुक्ति पत्र सौंपे। इसी क्रम में नुसरत परवीन की बारी आई, जो हिजाब पहने मंच पर पहुंचीं।

वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक बवाल मच गया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने वीडियो शेयर करते हुए तीखा हमला बोला। RJD ने अपने आधिकारिक हैंडल से लिखा- “यह क्या हो गया है नीतीश जी को। मानसिक स्थिति बिल्कुल ही अब दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो चुके हैं।”
कांग्रेस ने भी इसे “शर्मनाक” और “घृणित” करार देते हुए नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने कहा कि राज्य के सबसे बड़े पद पर बैठा व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार करे तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। AIMIM और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे महिला की निजी और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
दूसरी ओर, JDU ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। पार्टी के मंत्री मोहम्मद जमा खान ने कहा कि यह स्नेहपूर्ण व्यवहार था, जैसे पिता बेटी का चेहरा देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा- “मुख्यमंत्री ने कामयाब बेटी का चेहरा दुनिया को दिखाना चाहा। नीतीश जी सभी समुदायों का सम्मान करते हैं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं।” JDU ने इसे विपक्ष की राजनीतिक साजिश बताया।
इस घटना पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स इसे अनुचित बता रहे हैं, तो कुछ इसे मामूली घटना मान रहे हैं। फिलहाल, महिला डॉक्टर नुसरत परवीन की ओर से कोई बयान नहीं आया है।
यह घटना बिहार की राजनीति में नया विवाद पैदा कर सकती है, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय और महिला अधिकारों के मुद्दे पर।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
