बिहार की सियासत में एक बार फिर बंगला विवाद सुर्खियों में है। नीतीश कुमार के एनडीए के साथ लौटते ही सबसे पहला निशाना लालू प्रसाद यादव का परिवार बना है। भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित विशाल सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस थमा दिया है।

यह वही बंगला है जिसमें लालू-राबड़ी परिवार जनवरी 2006 से लगातार रह रहा है।हालांकि सरकार ने राबड़ी देवी को तुरंत पटना के हार्डिंग रोड पर नया बंगला (39 हार्डिंग रोड) आवंटित कर दिया है,

लेकिन यह आवास उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के कारण मिला है। यानी जिस दिन नेता प्रतिपक्ष का पद गया, उसी दिन नया बंगला भी हाथ से निकल जाएगा।
पुराना बंगला क्यों नहीं छोड़ना चाहते लालू परिवार?

10 सर्कुलर रोड का बंगला करीब 2 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें विशाल लॉन, कई बैठक कक्ष, दर्जनों कमरे और पार्किंग की भरपूर जगह है। इसे लालू परिवार ने पिछले 20 सालों में अपने राजनीतिक मुख्यालय की तरह इस्तेमाल किया है। यहीं से तेजस्वी यादव ने 2020 का चुनाव लड़ा था, यहीं से आरजेडी की सारी रणनीति बनती रही है।नया बंगला (हार्डिंग रोड) इसके मुकाबले काफी छोटा है और लोकेशन के लिहाज से भी उतना रणनीतिक नहीं है। लेकिन असली वजह कुछ और है।
असली खेल: नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बचाने का:-

बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। विपक्ष का नेता बनने के लिए कम से कम 9 एमएलसी चाहिए। अभी आरजेडी के पास 13 एमएलसी हैं, जिनमें से:- 2 एमएलसी का कार्यकाल जुलाई 2026 में खत्म – 7 एमएलसी (5 स्थानीय निकाय कोटा + 2 विधानसभा कोटा) का कार्यकाल 2028 में खत्म – 4 एमएलसी (सभी विधानसभा कोटा) का कार्यकाल 2030 में खत्म 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी की सीटें 110 से घटकर सिर्फ 25 रह गई हैं। अब पार्टी के पास इतनी ताकत नहीं बची कि वह विधानसभा कोटे या स्थानीय निकाय कोटे से अकेले एमएलसी जीत सके।2026 में खाली होने वाली 2 सीटें लगभग तय मानिए कि एनडीए जीत लेगा। 2028 में खाली होने वाली 7 में से कम से कम 5-6 सीटें भी एनडीए के खाते में जा सकती हैं। इस तरह 2028 तक आरजेडी के एमएलसी घटकर 6-8 रह जाएंगे। यानी नेता प्रतिपक्ष का पद भी चला जाएगा और हार्डिंग रोड वाला नया बंगला भी हाथ से निकल जाएगा।
आरजेडी की रणनीति: कोर्ट का सहारा, समय खींचो:-

आरजेडी को अच्छी तरह पता है कि नया बंगला स्थायी नहीं है। इसलिए पार्टी ने साफ कह दिया है कि 10 सर्कुलर रोड का बंगला नहीं छोड़ा जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे मगनी लाल मंडल ने तो खुली चुनौती दे दी है – “जो करना है कर लो, बंगला नहीं छोड़ेंगे।”पार्टी अब हाईकोर्ट जाएगी। दलील यह होगी कि 2019 का हाईकोर्ट का फैसला सिर्फ आजीवन बंगला देने की व्यवस्था को खत्म करता है, लेकिन जब तक वैकल्पिक आवास नहीं दिया जाता, पुराना बंगला खाली करने को बाध्य नहीं किया जा सकता। इस कानूनी दांव से कम से कम 2-3 साल तक मामला लटकाया जा सकता है।
नीतीश का मास्टरस्ट्रोक या बीजेपी की चाल ?

आरजेडी इसे सीधे-सीधे राजनीतिक बदला बता रही है। पार्टी का कहना है कि 20 साल में सत्ता कई बार बदली, लेकिन किसी ने बंगला नहीं छीना। अब गृह विभाग बीजेपी के पास है, इसलिए लालू परिवार को अपमानित करने की कोशिश हो रही है।दूसरी तरफ नीतीश सरकार का कहना है कि वे सिर्फ हाईकोर्ट के 2019 के फैसले का पालन कर रहे हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला देने की व्यवस्था को असंवैधानिक बताया गया था।
अंत में सवाल वही: लालू परिवार कितने दिन टिकेगा ?

अगर कोर्ट से स्टे मिल गया तो 10 सर्कुलर रोड में 2028-29 तक रह सकते हैं
– अगर कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया तो अगले कुछ महीनों में ही बेदखली तय है
– और हार्डिंग रोड वाला नया बंगला? वह तो 2028 तक भी मुश्किल से टिकेगा तो सवाल फिर वही है
– लालू परिवार इस बार कितने दिन टिक पाएगा? सियासी गलियारे में चर्चा है कि यह सिर्फ बंगले की लड़ाई नहीं, बल्कि 2029-30 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव से पहले लालू परिवार को कमजोर करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।फिलहाल तो कोर्ट की गली में चर्चा है कि फैसला जो भी हो, बिहार की सियासत में एक युग का अंत नजर आ रहा है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
