संसद में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पार्टी के कई नेताओं ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, प्रियंका गांधी समेत करीब 20 से 25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चैंबर में पहुंचे और वहां तीखी बहस के दौरान संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन किया गया उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में कई तकनीकी और प्रक्रियागत गलतियां हैं रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन संसद की गरिमा बनाए रखना हर सांसद की जिम्मेदारी है उनका आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने भावनाओं में बहकर ऐसी भाषा का प्रयोग किया जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है उन्होंने इसे संसदीय इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि स्पीकर का पद निष्पक्ष और गरिमामय होता है, इसलिए उस पर व्यक्तिगत टिप्पणी या हमला करना उचित नहीं है वहीं, स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी रिजिजू ने सवाल खड़े किए उनका कहना है कि प्रस्ताव में नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया

और इसमें कई त्रुटियां हैं उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के प्रस्ताव को लाने से पहले संसदीय प्रक्रिया की स्पष्ट समझ होनी चाहिए रिजिजू ने कहा कि विपक्ष अगर किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना चाहता है तो वह नियमों के तहत कर सकता है, लेकिन जल्दबाजी में उठाया गया कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता हैदूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे अपने रुख पर कायम हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्पीकर विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दे रहे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचा जा रहा है पार्टी का मानना है कि अविश्वास प्रस्ताव संसदीय अधिकारों के तहत लाया गया है और इसमें कोई गलत प्रक्रिया नहीं अपनाई गईसंसद के भीतर यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कई अहम विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा चल रही है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है यदि आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा तो आगामी सत्रों में और अधिक हंगामे की आशंका है

संसदीय परंपरा के जानकारों का कहना है कि स्पीकर का पद राजनीतिक दलों से ऊपर माना जाता है.एक बार किसी सदस्य के स्पीकर बनने के बाद उससे निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि विपक्ष को किसी निर्णय पर आपत्ति है तो उसे नियमों के तहत चुनौती दी जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत आरोपों से बचना चाहिए इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की कार्यप्रणाली और राजनीतिक शिष्टाचार पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों पक्ष आपसी संवाद के जरिए विवाद को सुलझाते हैं या फिर यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग लेता है। फिलहाल, रिजिजू के आरोपों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर तीखी बयानबाजी जारी रहने की संभावना है
