कर्नाटक की सियासत में पिछले कई दिनों से चल रही मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान पर शनिवार को विराम लगता दिखाई दिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार सुबह एक साथ नाश्ता किया और इसके करीब एक घंटे बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकजुटता का संदेश दिया। दोनों नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है और न ही आगे होगा। यह मुलाकात दिल्ली स्थित पार्टी हाईकमान के स्पष्ट निर्देश पर हुई थी।
पिछले 15 दिनों से दोनों नेताओं के समर्थक सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोर-शोर से उठा रहे थे। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जिस 2.5-2.5 साल के फॉर्मूले की चर्चा हुई थी, उसे फिर से गरमाया जा रहा था, हालांकि कांग्रेस ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया था। समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और गुटबाजी के आरोपों ने पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए थे।

शनिवार सुबह 10:15 बजे सिद्धारमैया के आवास पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत के बाद दोनों नेता मीडिया के सामने आए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “मैं और डी.के. शिवकुमार एक ही परिवार के सदस्य हैं। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है, न था, न है और न आगे होगा। हम दोनों मिलकर कर्नाटक को विकास के पथ पर आगे ले जाएंगे।”
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी हाईकमान के प्रति पूरी निष्ठा जताते हुए कहा, “पार्टी हाईकमान जो फैसला लेगा, हम दोनों उसे शिरोधार्य करेंगे। हमारे बीच कोई गुट या ग्रुप नहीं है। कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को जो जनादेश दिया है, उसे हम मिलकर पूरा करेंगे। विकास और जनकल्याण हमारी प्राथमिकता है।”
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने दोनों नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया था कि गुटबाजी की सारी अफवाहों पर फुलस्टॉप लगाया जाए और एकजुट होकर सरकार चलाई जाए। पार्टी को आशंका थी कि यह विवाद अगर लंबा खिंचता रहा तो 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले ही विपक्ष को मौका मिल जाता। बीजेपी पहले से ही इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज का यह संयुक्त शो ऑफ यूनिटी भले ही अस्थायी सुखदायी लग रहा हो, लेकिन अंदरूनी तनाव पूरी तरह खत्म हुआ है, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता। लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय के बीच सत्ता के बंटवारे का पुराना समीकरण अभी भी कर्नाटक की सियासत को प्रभावित करता रहा है। सिद्धारमैया अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा, दलित) समीकरण के बड़े नेता हैं तो डी.के. शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के सबसे मजबूत चेहरे।
फिलहाल दोनों नेताओं ने विकास और पांच गारंटी योजनाओं को तेजी से लागू करने का भरोसा दिया है। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार और निगम-बोर्डों में नियुक्तियों को लेकर भी सहमति बनती दिख रही है।
कर्नाटक की जनता अब इंतजार कर रही है कि यह एकता कितने दिन टिकती है और राज्य में विकास कार्यों को कितनी तेजी मिलती है। लेकिन आज के लिए इतना तय है, कांग्रेस ने एक बार फिर संकट को टाल दिया है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
