हकीकत से उल्टा चल रही है NDA सरकार:-

पटना। 20 नवंबर को जब सम्राट चौधरी ने बिहार के गृह मंत्रालय की कुर्सी संभाली थी, तब उन्होंने बड़े जोश के साथ ऐलान किया था कि अब अपराधियों के लिए बिहार में जगह नहीं बचेगी, कानून तोड़ने वालों को या तो जेल होगी या फिर राज्य छोड़ना पड़ेगा। उनके समर्थक तो “यूपी मॉडल” और “बुलडोजर एक्शन” का राग अलापने लगे थे। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है।
10 दिनों के अंदर प्रदेश के अलग अलग जगह पर 45 से ज्यादा हत्याएं:-
गृह मंत्री बनने के महज दस दिनों के अंदर ही बिहार में अपराध ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 20 नवंबर से 29 नवंबर तक राज्य में कम से कम 45 से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं। ये आंकड़ा किसी सरकारी विज्ञप्ति का नहीं, बल्कि अलग-अलग जिलों से आई मीडिया खबरों के स्वतंत्र विश्लेषण का नतीजा है। असल संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि कई मामले अब तक पुलिस के पास दर्ज ही नहीं हुए।
1. राजधानी पटना में दिनदहाड़े प्रॉपर्टी डीलर को सरेआम गोलियों से छलनी कर दिया गया।
2. गया में एक युवक को सिर्फ इसलिए कनपट्टी पर गोली मार दी गई क्योंकि वह किसी से प्रेम कर रहा था।
3. सीवान में तो दरिंदगी की सारी हदें पार कर गई – एक नाबालिग लड़की का पहले बलात्कार किया गया, फिर उसकी हत्या कर शव ठिकाने लगा दिया गया। जब परिजन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा, “जवान लड़की है, कहीं घूमने चली गई होगी, आ जाएगी” कहकर टालती रही।इन दस दिनों में सिर कुचलकर हत्या, भाई-बहन दोनों को एक साथ मार डालना, गला रेतकर या धारदार हथियार से शरीर के टुकड़े-टुकड़े करना जैसी जघन्य वारदातें आम हो गई हैं। एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरा जब बिहार के किसी न किसी कोने से लाशें बरामद न हुई हों।
NDA का डबल इंजन के सरकार में अपराध आसमान छू रहा हैं:-

एनडीए की “डबल इंजन” सरकार के रहते अपराध का ग्राफ आसमान छू रहा है, लेकिन गृह मंत्रालय में बैठे सम्राट चौधरी और उनके आका नीतीश कुमार खामोश तमाशाई बने हुए हैं। न कोई ठोस कार्रवाई, न अपराधियों पर नकेल, न पुलिस में सुधार। सिर्फ खोखले बयान और सोशल मीडिया पर ढोल।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बोनस पीरियड में अपराधियों को खुली छूट मिल जाती है। सत्ता के नशे में चूर नेता यह भूल जाते हैं कि जनता ने उन्हें कुर्सी सुरक्षा के लिए दी थी, डर के लिए नहीं। बिहार आज फिर उस दौर में लौट आया है जहां रात को घर से निकलना भी जोखिम बन गया है। महिलाएं असुरक्षित, व्यापारी दहशत में, आम नागरिक लाचार। “सुशासन” का नारा देने वाली सरकार ने दस दिन में ही साबित कर दिया कि उनके लिए सत्ता सिर्फ कुर्सी बचाने का खेल है, जनता की जान की कीमत कुछ भी नहीं।जब तक अपराधियों के राजनीतिक संरक्षक सत्ता में बैठे रहेंगे, तब तक न बुलडोजर चलेगा, न अपराध रुकेगा। बिहार की जनता अब बस इंतजार कर रही है कि कब ये “डबल इंजन” पूरी तरह फेल होकर पटरी से उतरे।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
