नई दिल्ली- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में साफ कहा है कि वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को चुनावी राजनीति या किसी पार्टी के राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बोली थी कि वंदे मातरम् पर हो रही बहस का कारण पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का नजदीक होना है लोकसभा में वंदे मातरम् को लेकर बहस छिड़ गई प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बहस का उद्देश्य राजनीतिक एजेंडा और चुनावी लाभ लेना है वंदे मातरम् पर बहस केवल इसलिए की जा रही है क्योंकि बंगाल में चुनाव आ रहे हैं,

और यह बहस राष्ट्रीय भावना से ज्यादा राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है इसके जवाब में अमित शाह ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् किसी पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के नागरिकों की राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है इस प्रकार के विषयों को चुनावी राजनीति में घसीटना देशभक्ति की भावना के खिलाफ है राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे राष्ट्रीय प्रतीकों और भावनाओं का सम्मान करें, न कि उनका उपयोग चुनावी लाभ के लिए करेंयह बहस लोकसभा में हुई, जहां विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला बहस में संसद के अंदर कई नेता शामिल हुए, जिन्होंने अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे पर बयान दिए प्रियंका गांधी ने अपने बयान कल संसद सत्र में दिया था, और अमित शाह ने इसको बुधवार को प्रतिकार करते हुए

जवाब प्रस्तुत किया है बहस का यह दौर संसद में पिछले कुछ दिनों से चल रहे चुनावी मुद्दों के संदर्भ में और अधिक गरमाया हुआ है प्रियंका गांधी का कहना है कि वंदे मातरम् पर बहस का कारण बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव है उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावी माहौल बनाने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर रहा है वहीं अमित शाह का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और भावनाओं को राजनीति में घसीटना अनुचित है वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति का प्रतीक है, और इसे राजनीतिक टकराव का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए वंदे मातरम् पर बहस राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि संवैधानिक और भावनात्मक दृष्टि से होनी चाहिए

उन्होंने सांसदों से अपील की कि देशभक्ति के प्रतीक को राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा न बनाएं उनके इस बयान ने संसद में बहस को नैतिक और भावनात्मक दिशा देने का काम किया इस बहस से संसद और मीडिया में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं यह बहस देशभक्ति और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को दर्शाती है इस घटना ने साफ कर दिया है कि चुनाव के नजदीक आने पर राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीति और बयानबाजी अधिक हो सकती है वंदे मातरम् जैसे मुद्दों पर बहस करना संवेदनशील है और इसे सिर्फ देशभक्ति और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, न कि किसी पार्टी के चुनावी फायदे के नजरिए से इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीति और राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच सीमा कहां खींची जाए
