देश के अलग-अलग कोनों से एक ही चीख उठ रही है – “हमारे वोट छीनने की साजिश चल रही है!” केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग बन चुकी है। विपक्ष इसे वोटर लिस्ट का नरसंहार बता रहा है तो सत्तापक्ष इसे लोकतंत्र की शुद्धिकरण प्रक्रिया। लेकिन जमीन पर जो हो रहा है, वह किसी भी नाम से डरावना है।
शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस का पांच सदस्यीय हाई-पावर डेलीगेशन निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचा। टीम में डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोस, नदीमुल हक और प्रतिमा मोंडल जैसे भारी-भरकम नाम थे। डेलीगेशन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को ज्ञापन सौंपते हुए SIR को तत्काल रोकने की मांग की। टीएमसी नेताओं का साफ कहना था, यह कोई रिवीजन नहीं, बल्कि सुनियोजित वोटर डिलीशन अभियान है।

विपक्षी दलों का दावा है कि पिछले 20-22 दिनों में कम से कम 26 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे दिनदहाड़े हत्या करार दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के BLO विपिन यादव का मामला उठाया। विपिन के परिजनों ने जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है – उन्हें बार-बार फोन आ रहे थे कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के वोटरों के नाम काट दो। मना करने पर धमकियां मिल रही थीं। आखिरी बार घर से निकलते वक्त वे बहुत डरे हुए थे।

सुप्रिया ने आरोप लगाया, SIR का असली मकसद मतदाता सूची से करोड़ों गरीब, दलित, आदिवासी और मुस्लिम वोटरों के नाम हटाना है। यह कोई सामान्य रिवीजन नहीं, बल्कि 2024 के बाद होने वाले हर चुनाव को पहले ही तय करने की सबसे खतरनाक स्क्रिप्ट है।

पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान से लगातार खबरें आ रही है कि BLO पर भयानक दबाव डाला जा रहा है। कुछ जगहों पर तो स्थानीय भाजपा नेता और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर BLO को टारगेट दे रहे हैं – फलां इलाके से इतने हजार नाम काटने हैं। जो BLO मना कर रहा है, उसे या तो निलंबित कर दिया जा रहा है या फिर उसकी जान को खतरा पैदा हो रहा है।
सबसे डरावनी बात यह है कि SIR के नाम पर जो फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं (यानी नाम काटने की अर्जी), उनमें ज्यादातर में हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नकली हैं। कई मामलों में तो जिन लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, उन्हें पता तक नहीं चल रहा। विपक्ष का कहना है कि यह काम रातोंरात, बिना किसी नोटिस के हो रहा है।चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक सिर्फ एक बयान आया है कि सारी शिकायतों की जांच की जा रही है और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस, टीएमसी, सपा, राजद, आप समेत तमाम दल सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल सिर्फ 26 BLO की मौत का नहीं है।
सवाल करोड़ों उन मतदाताओं का है जिन्हें चुपचाप, बिना बताए, उनके सबसे बड़े हथियार – उनके वोट – से वंचित किया जा रहा है लोकतंत्र की यह सफाई कितने खून से होगी, यह वक्त बताएगा।
लेकिन अभी जो खून बह रहा है, वह चीख-चीख कर बता रहा है – कुछ बहुत गलत हो रहा है।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
