हरियाणा के रोहतक शहर में बुधवार को नए लेबर कोड को लेकर किसान और मजदूर यूनियनों ने मिलकर बड़ा प्रदर्शन किया। सुबह से ही शहर के कई हिस्सों में यूनियनों के झंडे, पोस्टर और बैनर लेकर कार्यकर्ता इकट्ठा होने लगे। दोपहर तक हजारों की संख्या में मजदूर, किसान, खेत मजदूर, औद्योगिक कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शहर की मुख्य सड़कों पर उतर आए और सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड्स को मजदूर-विरोधी बताते हुए जोरदार विरोध जताया।

प्रदर्शनकारियों ने रोहतक की पुरानी सब्ज़ी मंडी से मिनी सचिवालय तक मार्च निकाला और नारे भी लगाएलेबर कोड वापस लो, मजदूर-किसान एकता ज़िंदाबाद ,शोषण बंद करो, ठेका प्रथा खत्म करो। लेबर कोड पर विवाद होने की वजह केंद्र सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को हटाकर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। सरकार का कहना है कि इससे श्रम व्यवस्था आधुनिक होगी, कामगारों को सुरक्षा मिलेगी और उद्योगों को भी काम करना आसान होगा लेकिन मजदूर संगठनों का दावा है कि इन कोड्स के लागू होने सेनौकरी की सुरक्षा घटेगी,फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट बढ़ेंगे,कंपनियों को बड़े स्तर पर कर्मचारियों को हटाने के अधिकार मिलेंगे,

यूनियन बनाने और हड़ताल करने का अधिकार कमजोर होगे जिसके वजह से सुबह 10 बजे यूनियनें अपने-अपने झंडों के साथ शहर के तीन अलग-अलग प्वाइंट पर एकजुट हुए है किसान यूनियनें, मजदूर संगठन, निर्माण श्रमिक, फैक्ट्री वर्कर, मनरेगा मजदूर, परिवहन और सफाई यूनियनें इस विरोध में शामिल थे कई संगठनों के नेता मंच पर पहुंचे और सरकार की नीतियों को निजीकरण और कॉर्पोरेट लाभ को बढ़ावा देने वाला बताया है वही भीड़ में शामिल एक मजदूर ने कहा कि हम 12-14 घंटे मजदूरी करते हैं ऊपर से ठेका प्रथा में रोज़ नौकरी का डर रहता है। नए कोड से हालत और खराब हो जाएगी अगर मजदूरों की नौकरी नहीं बचेगी मजदूरी कम होगी तो खेत-मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी

संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे दिसंबर में और बड़ा कार्यक्रम घोषित कर सकते हैं, जिसमें प्रदेशभर से हजारों मजदूर और किसान राजधानी में जुटेंगे।रोहतक में हुए इस संयुक्त विरोध ने साफ कर दिया है कि लेबर कोड केवल उद्योगों की बात नहीं बल्कि ग्रामीण खेत-मजदूर फैक्ट्री वर्कर महिला कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है।किसान और मजदूर एक साथ उतरकर सरकार को संदेश दे चुके हैं कि उनके अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं होगा।
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
