पाकिस्तान ने अयोध्या के राम मंदिर में पीएम नरेंद्र मोदी के धर्मध्वज पर विरोध जताया है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत की धार्मिक प्रसंग का बढ़ते दबाव और मुस्लिम विरासत को मिटाने की कोशिश का हिस्सा है 25 नवंबर 2025 को अयोध्या में आयोजित भव्य समारोह में नरेंद्र मोदी ने राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्मध्वज फहराया।

इस ऐतिहासिक क्षण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ RSS प्रमुख मोहन भागवत और अन्य धार्मिक व राजनैतिक गणमान्य लोग भी वहां मौजूद थे। ध्वजारोहण को मंदिर निर्माण के समापन और भारतीय संस्कृति धरोहर के पुनरुत्थान का प्रतीक माना गया। हालाँकि, वहीं दूसरी ओर इस घटना को लेकर पड़ोसी देश पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को मसलने की एक जानबूझकर कोशिश करार दिया है और भारतीय मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और हाशिए पर डालने की ओर कदम बताया है।

पाकिस्तान का कहना है कि यह मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है, जहाँ कभी ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद थी और उस मस्जिद को 1992 में तोड़ दिया गया था। अब उसी साइट पर हुए ध्वजारोहण को पाकिस्तान व उसके विदेश मंत्रालय ने मस्जिद विध्वंस के बाद पक्का कदम बताते हुए मुस्लिम विरासत को मिटाने की दिशा माना है। बयान में यह आरोप लगाया गया है कि भारत में मुस्लिम समुदाय को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से लगातार हाशिए की स्थिति पर धकेला जा रहा है।

ध्वजारोहण को इसी पैटर्न का हिस्सा बताया गया है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर United Nations (UN) और मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि वे भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मुस्लिम धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करें। ध्वजारोहण समारोह को भारत में कई लोग सांस्कृतिक और धार्मिक पुनरुत्थान के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं। सरकार व समर्थक इसे 500 सालों पुराने विवाद का हल, पहचान पुनर्स्थापना और आत्मा-साक्षात्कार मान रहे हैं।कि ये कदम धार्मिक पहचान को बढ़ावा देते हुए समाज में वैमनस्य और अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना भड़का सकते हैं विशेषकर जब अन्य समुदायों की धार्मिक संवेदनाओं व विरासत की बात हो। कुछ नेताओं और धार्मिक संगठनों ने इस दृष्टिकोण को लेकर चिंता भी जताई है।
रिपोर्ट
आसिफ खान
