तेहरान ,मॉस्को:- ईरान की राजनीति को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज दावा सामने आया है रिपोर्ट्स और कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई कथित तौर पर रूस जाने की संभावनाएं टटोल रहे हैं दावा किया जा रहा है कि देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक दबाव, सत्ता पर संकट और अस्थिर हालात के चलते खामेनेई किसी भी आपात स्थिति में देश छोड़ने की योजना बना सकते हैं।खामेनेई अकेले नहीं बल्कि अपने बेटे और बेहद भरोसेमंद सहयोगियों के साथ ईरान से बाहर जाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं कहा जा रहा है कि इस संभावित समूह में करीब 20 लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें सुरक्षा अधिकारी और राजनीतिक सलाहकार भी हैं हालांकि, ईरान सरकार या खामेनेई कार्यालय की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है यह दावा ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर गंभीर दबाव का सामना कर रहा है। एक ओर देश के भीतर आर्थिक संकट, महंगाई और जनता की नाराजगी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों के साथ तनाव ने हालात को और जटिल बना दिया है ऐसे माहौल में सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेता को लेकर किसी भी तरह की अटकलें तेजी से फैलती हैं खामेनेई ईरान की सत्ता व्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। उनकी पकड़ न सिर्फ सरकार पर बल्कि सेना, रिवोल्यूशनरी गार्ड और न्यायिक व्यवस्था पर भी मजबूत रही है।ऐसे में उनके देश छोड़ने के दावे को कुछ लोग राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति या मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा भी मान रहे हैं रूस का नाम सामने आना भी चर्चा का विषय है ईरान और रूस के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रिश्ते मजबूत हुए हैं सीरिया युद्ध से लेकर पश्चिमी देशों के खिलाफ साझा रुख तक,

दोनों देश कई मुद्दों पर एक-दूसरे के करीब रहे हैं ऐसे में यदि खामेनेई किसी सुरक्षित विकल्प पर विचार कर रहे हों, तो रूस को संभावित ठिकाने के रूप में देखा जाना आश्चर्यजनक नहीं माना जा रहा है हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह खारिज भी कर रहे हैं उनका कहना है कि खामेनेई की उम्र और उनकी वैचारिक स्थिति को देखते हुए ईरान छोड़ने की संभावना बेहद कम है उनके समर्थकों का मानना है कि सुप्रीम लीडर किसी भी परिस्थिति में देश छोड़ने के बजाय सत्ता और व्यवस्था को संभालने को प्राथमिकता देंगे।ईरान में इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं कुछ लोग इसे सत्ता के कमजोर होने का संकेत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अफवाह और विरोधी ताकतों की साजिश करार दे रहे हैं आम जनता के बीच भी इस खबर ने बेचैनी और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी हैं फिलहाल यह साफ नहीं है कि खामेनेई के रूस जाने की खबरों में कितनी सच्चाई है आधिकारिक बयान के अभाव में इसे सिर्फ दावा और अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है लेकिन इतना तय है कि इस खबर ने ईरान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं
