कनाडा के ओटावा में रविवार को संग्रह के दौरान भारतीय ध्वज तिरंगे को नीचे गिराकर अपमान किया गया खालिस्तान समर्थकों द्वारा आयोजित एक विवादित जनमत-संग्रह ने भारत-कनाडा के बीच तनातनी को फिर से बढ़ा दिया है। इस कार्यक्रम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सार्वजनिक अपमान किया गया साथ ही प्रधानमंत्री और अन्य भारतीय नेताओं के खिलाफ मार डालो जैसे हिंसक नारे भी लगाए गए। इस घटना ने न केवल भारतीय विदेश मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है बल्कि कनाडा में बसे भारतीय डायस्पोरा समुदाय में भी गहरी नाराजगी उत्पन्न हुई है यह मामला 23 नवंबर 2025 को कनाडा की राजधानी ओटावा में सामने आया जहाँ Sikhs for Justice नामक संगठन ने कथित खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित किया इस आयोजन के लिए हजारों लोग पहुंचे SFJ दावा करता है कि 53,000 से अधिक लोगों ने विभिन्न कनाडाई प्रांतों (जैसे ओंटारियो, अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और क्यूबेक) से मतदान किया।

इस जनमत-संघ का उद्देश्य पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राज्य की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देना है, जो भारत की संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती है। SFJ को भारत में आतंकी संगठन घोषित किया गया है इसलिए यह आयोजन भारत की नज़र में बेहद संवेदनशील था। #भारतीय तिरंगे का अपमान और नारे :-जनमत-संग्रह के दौरान हुए भाषणों और प्रदर्शनों में खालिस्तान समर्थकों ने स्पष्ट रूप से नफरत और कट्टरता भरे नारे लगाए। रिपोर्टों और वीडियो फुटेज में यह देखा गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारतीय तिरंगे को पैरों तले रौंदा उसे फाड़ा और अपमानजनक तरीके से पेश किया।

उसी मंच पर मार डालो घेरो-काटो जैसे नारे लगाए गए जो न केवल राजनैतिक असहमति से आगे जाकर हिंसा की भाषा में बदल गए है यह दृश्य और भाषा भारतीय नागरिकों और सरकार दोनों के लिए गहरा झटका हैं, क्योंकि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान और नेताओं के खिलाफ हिंसक नारे लोकतांत्रिक संवाद की सीमाओं को पार करते दिखते हैं।भारत सरकार ने इस घटना पर गहरी चिंता और कड़ी आपत्ति जताई है। SFJ जैसी संगठनों की इस तरह की अलगाववादी गतिविधियाँ भारत के प्रति प्रतिकूल और खतरनाक मानी जाती हैं। भारत की प्रतिक्रिया में यह भी कहा गया कि कनाडा की धरती पर ऐसी गतिविधियाँ भारत-विरोधी एजेंडा को आगे बढ़ाती हैं और यह तथ्य कि विदेशी भूमि पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किया गया है जो भारत-कनाडा संबंधों को और जटिल बना सकता है।कनाडा में बसे भारतीय समुदाय ने भी इस कार्यक्रम का जोरदार विरोध किया।

पिछले साल इसी तरह के खालिस्तान समर्थक विरोधों के दौरान, टोरंटो के भारतीय कांसुलेट के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय डायस्पोरा ने तिरंगा लहराया और भारत माता की जय, वन्दे मातरम के नारे लगाए थे वे वर्ग स्पष्ट रूप से खालिस्तान समर्थकों के प्रदर्शन के खिलाफ थे और उन्होंने संयुक्त रूप से यह संदेश दिया कि कनाडा हो या भारत उन्हें अपने राष्ट्रीय प्रतीकों और राजनैतिक अस्मिता का सम्मान चाहिए। कई डायस्पोरा सदस्यों ने कहा कि यह केवल स्वतंत्रता अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि कट्टर राष्ट्रवादी और हिंसक विचारधारा का प्रचार है, जो भारत की एकता और संप्रभुता के लिए खतरा है।यह घटना सिर्फ एक प्रदर्शन का विषय नहीं है यह संभावित रूप से भारत-कनाडा संबंधों को नई चुनौतियाँ दे सकती है। अगर इस तरह की अलगाववादी गतिविधियाँ बढ़ती हैं तो,

(i) भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव बढ़ सकता है दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों को मध्यस्थता करनी पड़ सकती है
(ii) भारतीय डायस्पोरा समुदाय में भी असुरक्षा और ध्रुवीकरण बढ़ेगा, क्योंकि कई लोग अपनी राष्ट्रीय पहचान और सम्मान के लिए खड़े होंगे
(iii) खालिस्तान समर्थक समूहों की गतिविधियों में कानूनी और वित्तीय निगरानी बढ़ सकती है। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय साझेदार मिलकर ऐसे समूहों पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
(iv)आम जनता, विशेष रूप से भारतीय मूल के नागरिकों में राजनयिक जागरूकता बढ़ेगी वे देखेंगे कि उनकी आवाज़ विदेशों में कैसे काम करती है और राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
