कोटा, राजस्थान।,मध्य प्रदेश:-हर साल की तरह इस बार भी मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की कोटा में यह पर्व विशेष रूप से अद्भुत रूप में मनाया गया, जहां स्थानीय लोगों ने मगरमच्छ की पूजा कर इसे अनोखा आकर्षण बनाया मगरमच्छ को पूजने की यह परंपरा स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है और इसे देखकर आसपास के लोग उत्साहित नजर आए श्रद्धालुओं ने मगरमच्छ की पूजा कर अपने मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिए दीप और प्रसाद अर्पित किए वहीं, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मकर संक्रांति के अवसर पर हादसे भी सामने आए मांझे के कारण कई युवकों की गर्दन कटने की घटनाएँ हुईं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने प्रभावित युवकों को अस्पताल पहुंचाया, और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की हैमकर संक्रांति पर गंगा, नर्मदा और शिप्रा नदियों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली लोग विशेष पूजा-अर्चना और तिल-खीर, गुड़ और तिलक चढ़ाने की परंपरा निभाने के लिए नदियों के किनारे जमा हुए

कई स्थानों पर सुबह-सुबह ही लोग स्नान कर, व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते दिखे। यह दृश्य पर्व की भव्यता और भारतीय संस्कृति में नदियों के महत्व को दर्शाता है सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने नदियों के किनारे तैनाती बढ़ाई, ताकि भीड़ के बीच किसी प्रकार की दुर्घटना न हो बावजूद इसके, कुछ जगहों पर असावधानी के कारण मामूली चोटें और हादसे रिपोर्ट हुए। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों पर नजर रखेंकोटा में मगरमच्छ की पूजा ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया इस पूजा में भाग लेने वालों ने इसे सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक बताया है मगरमच्छ की पूजा से जुड़ी इस परंपरा के अनुसार, यह जीव नदी और जल जीवन के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है स्थानीय लोगों का कहना था कि इस अनोखी पूजा से लोगों में प्राकृतिक जीवों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ती है मकर संक्रांति का पर्व भारत में न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी अवसर है राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह पर्व लोग बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं

परंपरागत गीत, लोकनृत्य, पतंगबाजी और विशेष पकवान जैसे तिल-गुड़ की खिचड़ी और खाजा इस पर्व की रौनक को बढ़ाते हैंहालांकि, सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार सजग रहा हादसों और चोटों की खबरों के बावजूद, अधिकांश श्रद्धालु पर्व का आनंद लेते दिखे स्थानीय मीडिया ने भी इस पर्व की भव्यता और मगरमच्छ पूजा की अनोखी झलक को प्रमुखता से दिखाया लोगों ने कहा कि यह पर्व हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को जीवित रखने का एक जरिया हैइस तरह, मकर संक्रांति का यह साल कोटा और अन्य जिलों में श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक विविधता के मिश्रण के साथ यादगार बना मगरमच्छ की पूजा ने इसे और रोचक और अनोखा बना दिया, जबकि गंगा, नर्मदा और शिप्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस पर्व की महिमा को और बढ़ाया प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इसे सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से मनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी इसी तरह जीवित रहे
