क्या देश के एक शक्तिशाली मंत्री को एक दलित इनफ्लुएंसर के सवालों से इतना डर लग गया की 50 करोड़ का केस ठोक दिया, क्या भारत में अब कोई रिपोर्ट पढ़ना भी गुनाह हो गया है नितिन गडकरी जो खुद को विकास पुरुष कहते हैं क्या उनका विकास इतना कमजोर है कि मुकेश मोहन की एक वीडियो से हिल गया, the कारवां के रिपोर्ट में जो तथ्य थे मुकेश भाई ने सिर्फ वही जनता के सामने रखें अगर रिपोर्ट गलत थी तो मैगजीन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई एक अकेले इनफ्लुएंसर को निशाना क्यों बनाया गया,

नागपुर पुलिस स्टेशन में तीन दिनों से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है क्या ये वहीं पुलिस है जो असल अपराधियों को पकड़ने में सुस्त रहती है लेकिन सत्ता के खिलाफ बोलने वालों पर चीते की रफ्तार में झपट्टा मारती है यह हमला सिर्फ मुकेश मोहन पर नहीं है यह हर उस शख्स पर है जो सरकार की आंखों में आंखें डालकर सच बोलता है अगर आज हमने इस पावर पॉलिटिक्स के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो कल हम में से किसी का भी नंबर हो सकता है
