नई दिल्ली, पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, कि जिसने फैंस और मीडिया में हलचल मचा दी है दिलजीत ने कहा कि।मैं इस दुनिया से जा चुका हूं और कलाकारों को जिंदा रहते हुए हमेशा परेशान किया जाता है, लेकिन जब वह मर जाते हैं, तब उनके बारे में कसीदे पढ़े जाते हैं दिलजीत का यह बयान, उन कलाकारों के प्रति उनकी निराशा को दर्शाता है जो ज़िंदगी में अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष को सही मूल्य नहीं मिल पाता है, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उन्हें बहुत सम्मान और श्रद्धा दी जाती है हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने दर्द को जाहिर करते हुए कहा कि कलाकारों को जिंदा रहते हुए हमेशा परेशान किया जाता है, उनका मजाक उड़ाया जाता है और उनके काम को नजरअंदाज किया जाता है लेकिन जब वह इस दुनिया से चले जाते हैं, तब हर कोई उनके काम की सराहना करने लगता है और उनके बारे में कसीदे पढ़े जाते हैं

मैं इस दुनिया से जा चुका हूं यह बयान उन्होंने उन कलाकारों के संघर्ष और सामाजिक मान्यता पर गहरी निराशा के रूप में दिया यह बयान दिलजीत ने उस स्थिति के बारे में दिया, जब कई कलाकारों को अपनी ज़िंदगी में सम्मान और पहचान नहीं मिलती उनका कहना था कि कलाकार को जब वह जिंदा रहते हैं तब ही उनकी मेहनत को सच्ची क़द्र मिलनी चाहिए, न कि जब वह इस दुनिया में नहीं होते यह बयान कलाकारों के प्रति समाज की असंवेदनशीलता और व्यावसायिक दुनिया की वास्तविकता को उजागर करता है यह बयान दिलजीत ने एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जो हाल ही में विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित हुआ दिलजीत की यह टिप्पणी सोशल मीडिया और मीडिया जगत में तेजी से फैल गई है

और इस पर कई लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं यह बयान हाल ही में दिसंबर 2025 में एक इंटरव्यू के दौरान दिया जिसमें उनके इस बयान ने उनके फैंस के बीच भी हलचल मचा दी है और कई लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं यह बयान उन कलाकारों की स्थिति को उजागर करता है जिन्हें ज़िंदगी में संघर्ष और आलोचना का सामना करना पड़ता है, लेकिन मरने के बाद उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है यह समाज की उस मानसिकता को चुनौती देता है जिसमें अक्सर कलाकारों को उनके योगदान के बजाय उनके निजी जीवन और विवादों के आधार पर जज किया जाता है दिलजीत की यह बात उनके व्यक्तिगत अनुभव और समाज की वास्तविकताओं पर गहरी टिप्पणी है दिलजीत ने अपने इस बयान को साझा किया और समाज और संस्कारों पर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है

उन्होंने खुलकर अपने दिल की बात रखी और बताया कि कैसे एक कलाकार को जिंदा रहते संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन उसकी कला और योगदान को सही समय पर कद्र नहीं मिलती दिलजीत का यह बयान उन कलाकारों के लिए एक आवाज़ बन सकता है जो इस समाज में अपने संघर्षों को अनदेखा होते हुए महसूस करते हैं यह साफ हो जाता है कि कलाकारों को सम्मान और पहचान उनके जीवनकाल में मिलनी चाहिए, न कि उनके निधन के बाद।इसके बाद, यह उम्मीद की जा सकती है कि इस पर और चर्चाएं होंगी और कलाकारों के लिए समाज में एक बेहतर समझ और सराहना का माहौल बनेगा
