अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान को लेकर किए गए ताजा बयान पर भारत की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने ट्रम्प के उस दावे पर कड़ा तंज कसा है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका था कांग्रेस का कहना है कि ट्रम्प अब तक 71वीं बार इस तरह का दावा कर चुके हैं और हैरानी की बात यह है कि उन्होंने दो दिन के भीतर तीन बार खुद को इसका श्रेय दिया हैकांग्रेस नेताओं ने ट्रम्प को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोस्त बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर भारत सरकार इस तरह के बयानों पर चुप क्यों है पार्टी का कहना है कि भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बार-बार बाहरी नेता द्वारा खुद को श्रेय देना भारत की विदेश नीति और संप्रभुता पर सवाल खड़े करता हैकांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि ट्रम्प का यह दावा न तो भारत सरकार ने कभी स्वीकार किया है और न ही किसी आधिकारिक मंच पर इसकी पुष्टि हुई है इसके बावजूद ट्रम्प लगातार यह बयान दोहरा रहे हैं कि उन्होंने दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध रुकवाया। कांग्रेस का आरोप है कि यह केवल राजनीतिक प्रचार और आत्मप्रशंसा का हिस्सा है

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि अगर वाकई ट्रम्प ने ऐसा कोई निर्णायक हस्तक्षेप किया था, तो भारत सरकार ने अब तक संसद या देश को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी। पार्टी का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और सैन्य फैसले भारत की आंतरिक रणनीति और कूटनीति का हिस्सा होते हैं, न कि किसी विदेशी नेता की व्यक्तिगत उपलब्धिराजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रम्प पहले भी कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा कर चुके हैं हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर हमेशा यह रुख अपनाया है कि कश्मीर और भारत-पाक संबंधों से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं है ऐसे में ट्रम्प के बार-बार किए जा रहे दावे भारत के स्थापित कूटनीतिक रुख के विपरीत माने जाते हैं।कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को भी घेरा है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रम्प की कथित दोस्ती के कारण सरकार इस बयान पर प्रतिक्रिया देने से बच रही है। कांग्रेस के मुताबिक, अगर यही बयान किसी और विदेशी नेता ने दिया होता, तो सरकार कड़ा जवाब देतीवहीं, भाजपा की ओर से इस मामले में अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है

हालांकि, पार्टी के समर्थक इसे ट्रम्प की आदत बताते हुए नजरअंदाज करने की बात कर रहे हैं उनका कहना है कि ट्रम्प अपने बयानों में अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैंविदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गलत या अतिरंजित बयान दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर सकते हैं ऐसे में भारत सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपने आधिकारिक रुख को स्पष्ट करे कुल मिलाकर, ट्रम्प के ताजा बयान ने भारत की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कांग्रेस इसे भारत की कूटनीतिक गरिमा से जोड़कर देख रही है, जबकि सरकार की चुप्पी विपक्ष के सवालों को और तेज कर रही है भारत सरकार इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ती है
