शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है एक बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है विपक्ष ने सरकार को घेरने का मौका नहीं छोड़ा, जबकि सत्तापक्ष की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिशें तेज हो गई हैं इसी कड़ी में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सामने आए और उन्होंने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि सरकार संत समाज का सम्मान करती है और किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर किया जाएगाविवाद तब और बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी कर दी। उन्होंने सरकार पर संतों और धार्मिक परंपराओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। शिवपाल के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया विपक्ष ने इसे आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बतायास्थिति को बिगड़ता देख ब्रजेश पाठक ने मीडिया के सामने आकर कहा कि शंकराचार्य जैसे सम्मानित धर्मगुरुओं के प्रति सरकार की श्रद्धा अटूट है

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है पाठक ने यह भी कहा कि सरकार सभी धर्मों और संत समाज का समान रूप से आदर करती है और अनावश्यक विवाद खड़ा करना ठीक नहीं हैराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील बन गया है ऐसे मुद्दों पर छोटी सी बात भी बड़ा रूप ले सकती है यही कारण है कि सरकार की ओर से तुरंत डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनाई गई पार्टी संगठन को भी सक्रिय किया गया ताकि जमीनी स्तर पर संदेश स्पष्ट किया जा सके वहीं विपक्ष इस मुद्दे को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहा है। शिवपाल के बयान को भाजपा के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार इसे शांत करने और संत समाज का विश्वास बनाए रखने की कोशिश में जुटी हुई है
