भारत और रूस ने हाल ही में व्यापार और लॉजिस्टिक सुधार को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा इस समझौते के तहत अब भारत से रूस जाने वाला सामान पारंपरिक 40 दिन की बजाय केवल लगभग 24 दिन में पहुँच सकेगा इस बदलाव से 6000 किलोमीटर का मार्ग कम होगा और व्यापारियों को समय और लागत दोनों में भारी लाभ मिलेगा इसके साथ ही, दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार करने का लक्ष्य तय किया है समझौते के तहत भारत और रूस ने लॉजिस्टिक और व्यापारिक रूट्स में सुधार किया है

अब माल पहले की तुलना में 16 दिन जल्दी पहुंचेगा यह बदलाव समुद्री, रेल और सड़क मार्गों के सुधार, पोर्ट अपग्रेडेशन, और कस्टम प्रक्रियाओं में सरलीकरण के माध्यम से संभव हुआ है यह कदम एशिया यूरोप सप्लाई चेन में भी बदलाव लाएगा और व्यापार में दक्षता बढ़ाएगा इस समझौते में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस की ओर से राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता थे दोनों देशों की व्यापार, लॉजिस्टिक और पोर्ट अथॉरिटीज ने इस समझौते को लागू करने की योजना बनाई इसके अलावा, निर्यातक और आयातक, जो इस नए मार्ग से सीधे लाभान्वित होंगे, और विशेषज्ञ एवं आर्थिक सलाहकार भी इस योजना में शामिल थे यह समझौता दिसंबर 2025 में भारत–रूस शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ इस शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने व्यापारिक रूट्स, लॉजिस्टिक सुधार और दीर्घकालीन रणनीति तय की इस समझौते का प्रभाव आने वाले वर्षों में दिखाई देगा और 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई गई हैयह समझौते का आयोजन नई दिल्ली में हुआ,

जहां दोनों देशों के उच्चस्तरीय अधिकारी मौजूद थे नए व्यापारिक और लॉजिस्टिक मार्ग भारत के प्रमुख बंदरगाहों से शुरू होकर रूस के विभिन्न बाजारों तक फैलेंगे इसमें समुद्री, रेल और सड़क मार्गों का मिश्रित नेटवर्क शामिल होगा यह पूरा बदलाव पूरे एशिया–यूरोप सप्लाई चेन नेटवर्क को तेज़ और सुरक्षित बनाने की दिशा में किया गया है सबसे बड़ा कारण समय और लागत में बचत है माल को 40 दिन की बजाय 24 दिन में पहुँचाना व्यापारियों के लिए फायदेमंद होगायह कदम दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उठाया गयालॉजिस्टिक सुधार, पोर्ट अपग्रेडेशन और कस्टम सरलीकरण से सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और प्रभावी बनेगी 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य औद्योगिक, कृषि, ऊर्जा, उर्वरक, निर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देगा नई लॉजिस्टिक योजना के तहत पारंपरिक लंबी समुद्री यात्रा की जगह तेज़ और कुशल मार्ग अपनाए जाएंगे मल्टीमॉडल ऑप्शन — समुद्र + रेल/सड़क के संयोजन से समय और लागत में बचत होगी ,पोर्ट अपग्रेडेशन और कस्टम सरलीकरण के जरिए माल तेजी से पार किया जाएगा।,

प्रक्रियाएं और निवेश योजनाओं को समझौते में शामिल किया गया ताकि लंबी अवधि में सप्लाई चेन स्थिर और प्रभावी रहे।व्यापारियों को डायरेक्ट मार्ग और समयबद्ध डिलीवरी मिलेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लाभ में सुधार होगा यह समझौता दोनों देशों के दीर्घकालीन व्यापार और लॉजिस्टिक सुधार का संकेत है समय और लागत में बचत, सप्लाई चेन में सुधार और 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य इसे आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं इससे निर्यातकों, आयातकों और उद्योगों को लाभ मिलेगा और दोनों देशों के व्यापारिक संबंध नई ऊँचाई तक पहुँचेंगे
