गाजा में जारी मानवीय संकट और लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच शांति की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है कतर, तुर्किये और पाकिस्तान समेत कुल आठ इस्लामिक देशों ने गाजा के लिए गठित किए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला किया है इस संबंध में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर गाजा में स्थायी शांति, संघर्षविराम और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई हैसंयुक्त बयान में कहा गया है कि गाजा में हालात बेहद चिंताजनक हैं और वहां आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य गाजा संकट को केवल सैन्य नजरिए से नहीं, बल्कि राजनीतिक, मानवीय और कूटनीतिक समाधान के जरिए सुलझाना है

इस पहल में शामिल देशों का मानना है कि गाजा में शांति तभी संभव है जब हिंसा को रोका जाए, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुंचाई जाए बोर्ड के माध्यम से ये देश संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर युद्धविराम लागू कराने, राहत सामग्री पहुंचाने और भविष्य के लिए राजनीतिक रोडमैप तैयार करने की कोशिश करेंगेकतर और तुर्किये पहले भी गाजा संकट में मध्यस्थता की भूमिका निभाते रहे हैं, जबकि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी मुद्दे को लगातार उठाया है अब इन देशों के साथ अन्य इस्लामिक देशों की भागीदारी से इस पहल को कूटनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह बोर्ड प्रभावी ढंग से काम करता है, तो गाजा संकट के समाधान की दिशा में एक नया रास्ता खुल सकता है संयुक्त बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि गाजा में शांति केवल अस्थायी युद्धविराम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान जरूरी है इसमें दो-राज्य समाधान, फिलिस्तीनियों के अधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को अहम बताया गया है।

बोर्ड ऑफ पीस इन सभी मुद्दों पर एक साझा रणनीति के तहत काम करेगाइसके साथ ही इन देशों ने गाजा में मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताई है बयान में कहा गया है कि अस्पतालों, स्कूलों और नागरिक ठिकानों पर हमलों से हालात और गंभीर हो गए हैं। बोर्ड का एक प्रमुख लक्ष्य मानवीय संगठनों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और राहत कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करना भी होगा राजनयिक हलकों में इस पहल को गाजा संकट के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक शक्तियां और संघर्ष से जुड़े पक्ष इस पहल को किस हद तक समर्थन देते हैं। फिलहाल, 8 इस्लामिक देशों की यह संयुक्त पहल गाजा में शांति की उम्मीद को एक नया आधार देती नजर आ रही है
