बहराइच में धार्मिक झंडे को लेकर हुई हिंसा और युवक की हत्या के मामले में आखिरकार अदालत ने सबसे कड़ी सजा सुनाते हुए मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा दी है यह वही मामला है जिसने पूरे प्रदेश में तनाव पैदा कर दिया था, जब इलाके में हरा झंडा हटाकर भगवा झंडा लगाने की बात पर विवाद हुआ और देखते ही देखते यह मामला गोलीबारी तक पहुँच गया था इस वारदात में सरफराज ने एक युवक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था, जबकि भीड़ ने हिंसा को और भड़का दिया कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह अपराध रेयर ऑफ द रेयरेस्ट की श्रेणी में आता है, इसलिए इससे कम सजा समाज में गलत संदेश देगी यह घटना के दौरान कुल 10 लोग आरोपी बनाए गए थे न्यायालय ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा देते हुए बाकी 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है अदालत ने माना कि सभी आरोपियों की भूमिका हिंसा फैलाने, हमला करने और अपराध को अंजाम देने में साबित हुई है

इस फैसले ने पूरे जिले में मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा की है कुछ लोग इसे न्याय की जीत मान रहे हैं, जबकि कुछ इलाकों में पुलिस ने एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि माहौल में कोई तनाव न फैले यह घटना उस समय सामने आई थी जब कुछ युवकों ने इलाके में भगवा झंडा फहराने की कोशिश की स्थानीय लोगों के बीच यह बात तेजी से फैल गई कि पहले से लगे हरे झंडे को हटाया गया है इसी बात पर दोनों पक्षों में बहस, विवाद और फिर हाथापाई शुरू हुई पुलिस के पहुंचने से पहले ही सरफराज ने पिस्तौल निकालकर युवक पर गोली चला दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई पुलिस ने जांच के दौरान हथियार बरामद किया, गवाहों के बयान लिए और सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में पेश किया

सरफराज के खिलाफ सबूत इतने मजबूत थे कि अदालत ने कहा यह अपराध योजनाबद्ध नहीं था लेकिन यह सीधा-सीधा जान लेने का इरादा था धार्मिक प्रतीक को लेकर किसी की हत्या करना अत्यंत गंभीर अपराध है अगर इस मामले में कड़ी सजा नहीं दी गई तो समाज में यह संदेश जाएगा कि धार्मिक विवाद के नाम पर हिंसा करना सामान्य बात है अदालत का यह फैसला आने के बाद जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई है और सोशल मीडिया की निगरानी भी तेज कर दी है

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें वहीं पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें अब न्याय मिला है और उनका विश्वास अदालत पर और मजबूत हुआ हैयह फैसला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव से जुड़ी कई घटनाएँ चर्चा में रही है आने वाले दिनों में राजनीतिक बहसों में भी केंद्र में रहने वाला है, क्योंकि धार्मिक प्रतीकों को लेकर संघर्ष लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है
